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मनसा देवी मंदिर में ‘बिना जेब वाले कुर्ते’ के नियम पर शेखर सुमन का तंज, बोले- ‘ईमानदारी सिलाई से नहीं आती’

Shekhar Suman on Shekhar Tonite: 'शेखर टुनाइट' में शेखर सुमन ने पुजारियों के बिना जेब वाले कुर्ते के नियम पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि ईमानदारी कपड़ों से नहीं, बल्कि सोच, संस्कार और चरित्र से आती है। जानिए उनके व्यंग्य का पूरा संदेश।
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मुंबई

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Rashi Sharma

Jul 24, 2026

Shekhar Suman

मनसा देवी मंदिर में बने नियम पर शेखर सुमन ने किया तंज। (फोटो सोर्स: instagram-shekhartonite)

Shekhar Suman Shekhar Tonight Ram Mandir Satire: कॉमेडियन, अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन अपने टॉक शो 'शेखर टुनाइट' में आमतौर पर देश में चल रहे अहम मुद्दों पर अपने मजाकिया अंदाज में अपनी बात रखते हैं और व्यंग करते हैं। हाल ही में शो के एक एपिसोड में उन्होंने उत्तराखंड के मनसा देवी ट्रस्ट के उस फैसले पर कटाक्ष किया, जिसमें राम मंदिर में चोरी की खबरों के बाद एक अनोखा नियम बनाया गया कि अब सभी पुजारी बिना जेब वाला कुर्ता पहनेंगे। इस फैसले को आधार बनाकर शेखर सुमन ने शो में एक ऐसा व्यंग्य पेश किया, जिसने ऑडियंस को सिर्फ हंसाया नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता और चरित्र निर्माण को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए।

ईमानदारी सिलाई से नहीं आती

शेखर सुमन ने कहा, "राम मंदिर में चोरी की खबर के बाद उत्तराखंड मनसा देवी ट्रस्ट ने नया नियम बनाते हुए कहा कि अब से सभी पुजारी बिना जेब का कुर्ता पहनेंगे। लो इतने सालों से हम सोचते रहे कि चरित्र निर्माण की जिम्मेदारी गुरु, माता-पिता और धर्म की होती है। अब पता चला कि असली जिम्मेदारी तो कपडा सिलने वालों की होती है।"

हल्का-फुल्का मजाक, लेकिन छिपा गहरा संदेश

पहली नजर में शेखर सुमन का ये एक हल्का-फुल्का मजाक लगता है, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश उससे कहीं अधिक गहरा है। ये व्यंग्य इस सोच पर प्रहार करता है कि नैतिक समस्याओं का समाधान केवल बाहरी नियमों या प्रतीकात्मक बदलावों से किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति की नीयत गलत है, तो केवल उसकी जेब हटा देने से वो ईमानदार नहीं बन जाएगा।

'शेखर टुनाइट' में शेखर सुमन का ये व्यंग्य सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि समाज और संस्थाओं के लिए एक सोचने योग्य संदेश भी था। उनका व्यंग्य इस बात पर जोर देता है कि ईमानदारी और चरित्र का निर्माण कपड़ों, नियमों या बाहरी बदलावों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के संस्कार, शिक्षा और सोच से होता है। चोरी रोकने के लिए जेब हटाना एक प्रशासनिक कदम हो सकता है, लेकिन चरित्र निर्माण का विकल्प कभी नहीं बन सकता।

क्या है राम मंदिर चंदा चोरी मुद्दा?

बीते कुछ दिनों से अयोध्या के राम मंदिर चंदा चोरी की खबरों के सामने आने के बाद मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था और पुजारियों की जवाबदेही पर चर्चाएं जोरों पर हैं। इसी बीच उत्तराखंड के मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने एहतियाती कदम उठाते हुए फैसला किया कि मंदिर के पुजारी अब बिना जेब वाला कुर्ता पहनेंगे। ट्रस्ट का कहना है कि ये फैसला पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी तरह के संदेह या अनियमितता से बचने के लिए लिया गया है। हालांकि, इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई, जहां कई लोगों ने इसे प्रतीकात्मक कदम बताया, जबकि कुछ ने इसे एक सुरक्षा उपाय माना।