
छगन भुजबल (Photo: IANS)
महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने राजेंद्र जैन को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। छगन भुजबल के नाम की जोरदार चर्चा के बीच पार्टी नेतृत्व ने अंतिम समय में राजेंद्र जैन पर भरोसा जताया।
सुनेत्रा पवार के आधिकारिक आवास ‘देवगिरि’ पर हुई राष्ट्रवादी कांग्रेस की कोर कमेटी बैठक में कई नामों पर विचार-विमर्श किया गया। हालांकि, लंबी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से राजेंद्र जैन के नाम पर मुहर लगाई गई। आज सुबह राज्य विधानभवन में वह अपना नामांकन दाखिल करेंगे।
बताया जा रहा है कि एनसीपी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल राज्यसभा जाने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्होंने एक बड़ी शर्त रखी थी। भुजबल चाहते थे कि उनके भतीजे और पूर्व सांसद समीर भुजबल को महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया जाए, उसके बाद ही वे राज्य सभा जाएंगे।
हालांकि, शनिवार देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक में यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि समीर भुजबल को फिलहाल मंत्री पद नहीं दिया जा सकता। दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) समीर भुजबल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, समीर भुजबल को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से छगन भुजबलने ने भी कथित तौर पर राज्य सभा जाने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद पार्टी ने राजेंद्र जैन के नाम पर अंतिम निर्णय ले लिया।
राज्यसभा सीट को लेकर सिर्फ छगन भुजबल ही नहीं, बल्कि भाजपा नेता नवनीत राणा का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ था। इसके अलावा एनसीपी नेता अमर सिंह पंडित भी इस सीट के लिए इच्छुक बताए जा रहे थे। लेकिन एनसीपी ने संगठन और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया।
राजेंद्र जैन को राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद प्रफुल्ल पटेल का बेहद करीबी माना जाता है। वे एक समय प्रफुल्ल पटेल के निजी सहायक (PA) भी रह चुके हैं। राजनीतिक और सहकारी क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने भंडारा-गोंदिया स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से 12 वर्षों तक विधान परिषद (MLC) में प्रतिनिधित्व किया है। इसके अलावा जिला सहकारी बैंक और फेडरेशन जैसी सहकारी संस्थाओं में भी उन्होंने लंबे समय तक काम किया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि पार्टी लंबे समय से विदर्भ क्षेत्र को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर रही थी। इसी सोच के तहत राजेंद्र जैन के नाम पर सहमति बनी। तटकरे ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने सभी पहलुओं पर गंभीर चर्चा की और एकमत से राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि जैन का राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
राज्यसभा टिकट नहीं मिलने के बाद छगन भुजबल की नाराजगी को लेकर चल रही चर्चाओं को भी सुनील तटकरे ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि छगन भुजबल एनसीपी के संस्थापक नेताओं में से एक हैं और पार्टी के लिए उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है।
तटकरे ने कहा कि छगन भुजबल का अनुभव और मार्गदर्शन आने वाले समय में पार्टी को दिशा देने का काम करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पार्टी के फैसले के साथ खड़े हैं और उनके सम्मान में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
राजेंद्र जैन को राज्य सभा उम्मीदवार बनाकर राष्ट्रवादी कांग्रेस ने एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। एक तरफ विदर्भ क्षेत्र को प्रतिनिधित्व दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि संगठनात्मक निष्ठा और लंबे समय से किए गए काम को प्राथमिकता दी जाएगी। अब राज्य सभा चुनाव में जैन की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की सियासत में भुजबल को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
Published on:
08 Jun 2026 08:00 am
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