
सुनील तटकरे और सुनेत्रा पवार (Photo: IANS)
NCP Maharashtra Leadership: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में संगठन नए सिरे से अपनी दिशा तय कर रहा है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे को हटाने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि अजित पवार के निधन के बाद संगठन में सत्ता का नया संतुलन बनाते समय एक और आंतरिक विवाद खड़ा हो।
दरअसल, पिछले कुछ समय से NCP के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज थी। सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार की राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ मुलाकात के बाद संगठन में बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था। इस मुलाकात को पार्टी की संगठनात्मक रणनीति और भविष्य की तैयारी से जोड़कर देखा गया था। हालांकि, पार्थ पवार ने बाद में प्रशांत किशोर को अपना करीबी दोस्त और भाई जैसा बताते हुए मुलाकात को अनौपचारिक बताया था।
अजित पवार के निधन के बाद NCP में नेतृत्व का नया ढांचा तैयार हो रहा है। सुनेत्रा पवार पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुकी हैं, जबकि पार्थ पवार भी संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में पार्टी के पुराने संगठनात्मक नेतृत्व और नए पवार परिवार केंद्रित नेतृत्व के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सुनील तटकरे लंबे समय से अजित पवार के करीबी नेताओं में रहे हैं। फरवरी 2026 में सुनेत्रा पवार को NCP का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के दौरान तटकरे को महाराष्ट्र इकाई के प्रदेश अध्यक्ष पद पर दोबारा चुना गया था।
इसके बावजूद बाद में संगठन में बदलाव की अटकलें तेज हो गईं। पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से तटकरे के खिलाफ आवाज भी उठी। इसी बीच पार्टी के भीतर यह चर्चा सामने आई कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नए चेहरे को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
सुनील तटकरे के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर दो नामों की चर्चा सामने आई। इनमें वरिष्ठ नेता दिलीप वलसे पाटील और अपेक्षाकृत युवा नेता अनिल भैदास पाटील का नाम शामिल है।
दिलीप वलसे पाटील को पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने लंबे समय तक अजित पवार के साथ काम किया है और सरकार में वित्त, ऊर्जा, उच्च एवं चिकित्सा शिक्षा तथा गृह जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। वह 2009 से 2014 तक महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
वहीं, अमलनेर से विधायक अनिल भैदास पाटील को NCP के अपेक्षाकृत युवा चेहरे के तौर पर देखा जाता है। वह 2019 में पहली बार विधानसभा पहुंचे और 2024 में भी अपनी सीट बचाने में सफल रहे। स्थानीय राजनीति और सहकारिता क्षेत्र के जरिए उन्होंने अपना राजनीतिक आधार मजबूत किया और बाद में अजित पवार के करीबी नेताओं में शामिल हो गए।
हालांकि, अनिल पाटील ने प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रही अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने इस पद के लिए अपना नाम चर्चा में होने की खबरों को लेकर किसी तरह की पुष्टि नहीं की है।
दिलीप वळसे पाटील को लेकर भी पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने नेतृत्व को संकेत दिया है कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता मंत्री पद नहीं, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक काम को मजबूत करना है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, वलसे पाटील सुनेत्रा पवार को बता चुके हैं कि वह संगठन के लिए अधिक समय देना चाहते हैं। ऐसे में अगर पार्टी में संगठनात्मक बदलाव होता है तो उनका नाम स्वाभाविक रूप से चर्चा में आना तय है।
सुनील तटकरे की प्रदेश अध्यक्ष पद पर दोबारा नियुक्ति को लेकर पार्टी के भीतर असहमति भी सामने आ चुकी है। NCP नेता भाऊसाहेब गोरे ने चुनाव आयोग का रुख करते हुए तटकरे की पुनर्नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
हालांकि, इन विवादों के बावजूद तटकरे पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। हाल के महीनों में भी वह NCP की गतिविधियों और राजनीतिक फैसलों में सक्रिय नजर आए हैं।
अजित पवार के निधन के बाद NCP के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी का भविष्य किस नेतृत्व और किस संगठनात्मक ढांचे के तहत आगे बढ़ेगा। जनवरी 2026 में विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली और फरवरी में उन्हें सर्वसम्मति से NCP का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।
इसके बाद पार्थ पवार की संगठन में सक्रियता बढ़ी है। दूसरी ओर, सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जैसे वरिष्ठ नेता अजित पवार की राजनीतिक टीम के पुराने और अनुभवी स्तंभ माने जाते हैं।
मई 2026 में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की प्रशांत किशोर से मुलाकात के बाद भी पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। उस समय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच नई और पुरानी नेतृत्व शैली को लेकर असहजता की खबरें सामने आई थीं।
सुनील तटकरे का राजनीतिक अनुभव और संगठन में उनका नेटवर्क उन्हें NCP के लिए महत्वपूर्ण बनाता है। वह चार दशक से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं और अजित पवार के करीबी नेताओं में रहे हैं।
ऐसे में अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाता है तो यह केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं होगा, बल्कि अजित पवार के बाद एनसीपी के भीतर शक्ति संतुलन में बड़े परिवर्तन का संकेत भी माना जाएगा।
दूसरी ओर, तटकरे को बनाए रखने से पार्टी के पुराने संगठनात्मक ढांचे को निरंतरता मिलती है। यही वजह है कि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी फिलहाल किसी जल्दबाजी से बचती हुई दिखाई दे रही है। हालिया घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि एनसीपी में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा भले ही जारी हो, लेकिन सुनील तटकरे को तत्काल हटाने का फैसला फिलहाल नहीं हुआ है।
Updated on:
17 Aug 2026 10:16 am
Published on:
17 Aug 2026 10:02 am
