
मुंबई के साकीनाका में भारी बारिश के बीच खुले मैनहोल में गिरने से 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई।
मुंबई में भारी बारिश के बीच एक बार फिर प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। अंधेरी ईस्ट के साकीनाका इलाके में एक खुले मैनहोल (गटर) में गिरने से 60 साल के एक बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया है और 'एल' वार्ड के असिस्टेंट कमिश्नर समेत चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। हर साल मानसून में जब किसी बेगुनाह की जान जाती है, तो जनता के आक्रोश को शांत करने के लिए आनन-फानन में कुछ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ सस्पेंशन से मुंबई की सड़कें सुरक्षित हो जाएंगी? 'एल' वार्ड में पिछले कई महीनों से ड्रेनेज और सड़कों के काम में लापरवाही की शिकायतें आ रही थीं, फिर भी सीनियर ऑडिटर्स और विजिलेंस टीम सोई हुई थी।
यह घटना साकीनाका के खैराणी रोड पर हुई। मृतक की पहचान यादव नगर के रहने वाले असलम शेख (60 वर्ष) के रूप में हुई है। चश्मदीदों और पुलिस के मुताबिक, हादसे के वक्त सड़क पर जलभराव था और वहां ड्रेनेज ग्रिल की मरम्मत का काम चल रहा था। असलम शेख सड़क से गुजर रहे थे और उस समय वह मोबाइल फोन पर बात करने में मग्न थे। पानी भरे होने के कारण उन्हें खुला हुआ मैनहोल नजर नहीं आया और वह सीधे उसमें जा गिरे।
शुरुआती जांच में पता चला है कि वहां काम कर रहे एक प्राइवेट ठेकेदार के तीन कर्मचारियों ने मरम्मत के लिए मैनहोल का ढक्कन हटाया था। लेकिन उन्होंने वहां कोई सुरक्षा घेरा या वार्निंग बोर्ड नहीं लगाया। जैसे ही असलम उसमें गिरे, कर्मचारियों ने उन्हें बचाने के लिए गटर में सीढ़ी भी डाली, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि असलम बह गए। गटर के अंदर सिर्फ उनका छाता और चप्पल ही फंसे रह गए।
दोपहर करीब 12:26 बजे इस घटना की जानकारी मुंबई फायर ब्रिगेड को दी गई। फायर अधिकारी ए.बी. सोनावने ने बताया कि सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई थी। गटर में पानी का करंट बहुत ज्यादा था, इसलिए टीम ने आगे वाले दूसरे मैनहोल को खोलकर तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद असलम को बेहोशी की हालत में पानी से बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस घटना से नाराज बीएमसी कमिश्नर ने न सिर्फ चार जिम्मेदार अफसरों को सस्पेंड किया है, बल्कि पूरे मामले की हाई-लेवल जांच के आदेश भी दे दिए हैं। एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (वेस्टर्न सबर्ब्स) की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है, जिसे 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। मुंबई की जनता इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रही है। मानसून की शुरुआत में ही हुई इस घटना ने बीएमसी के दावों की पोल खोल कर रख दी है।
Updated on:
2 Jul 2026, 6:33 PM IST
Published on:
2 Jul 2026, 6:33 PM IST
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