
उद्धव गुट में बगावत के बाद 'घर' में घमासान, फोटो सोर्स- IANS
Sanjay Raut Statement: महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के भीतर मची भगदड़ के बाद अब पार्टी के अंदरूनी कलह और असंतोष खुलकर सामने आने लगे हैं। दरअसल, बुधवार को राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक तीखे बयान ने इस बात को हवा दे दी है कि पार्टी के पुराने और वफादार नेताओं में 'खास ट्रीटमेंट' पाने वाले नेताओं को लेकर भारी नाराजगी है। यह स्थिति तब बनी है जब हाल ही में उद्धव गुट के 6 सांसदों और एक पूर्व विधायक ने पाला बदलकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का दामन थाम लिया।
6 सांसदों के जाने के बाद पार्टी में मचे संकट पर बोलते हुए संजय राउत ने कहा कि अब पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है। राउत ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि हमें इंसान के चरित्र को पहचानने की जरूरत है। पार्टी में कुछ लोगों को उनकी हैसियत से बहुत ज्यादा मिल गया, और इसी वजह से जो पार्टी के असली वफादार थे, उन्हें ठेस पहुंची।वहीं, राउत ने यह भी कहा कि जिन लोगों को पार्टी ने सब कुछ दिया, मलाई खाई, वही सबसे पहले फायदा उठाकर छोड़कर चले गए।
संजय राउत से ठीक एक दिन पहले, शिवसेना (UBT) के नेता सुनील शिंदे ने भी पार्टी नेतृत्व को आत्ममंथन की सलाह दी थी। यह बयान तब आया जब शिवसेना (UBT) के बड़े नेता और आदित्य ठाकरे के बेहद करीबी माने जाने वाले पूर्व विधायक सचिन अहीर मंगलवार को एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए। सचिन अहीर के जाने को वर्ली विधानसभा सीट (आदित्य ठाकरे का निर्वाचन क्षेत्र) के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, हालांकि सुनील शिंदे ने दावा किया कि इससे वर्ली में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
संजय राउत ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे पर भी तीखा तंज कसा। राउत ने कहा कि एकनाथ शिंदे का पूरा राजनीतिक करियर उद्धव ठाकरे के कंधों पर ही बना है। आज वो और उनके बेटे हमें राजनीति सिखा रहे हैं? अगर उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को पद, प्रतिष्ठा और ताकत नहीं दी होती, तो आज वह कहां होते? वह जो कुछ भी हैं, इसी नेतृत्व की बदौलत हैं।'
पिछले कुछ हफ्तों में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना एक बड़े संकट से गुजर रही है। पिछले दिनों 22 जून को शिवसेना (UBT) के 6 प्रमुख सांसदों संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निम्बालकर और संजय दीना पाटिल ने एक साथ एकनाथ शिंदे गुट का हाथ थाम लिया था, जिससे संसद में एनडीए की ताकत बढ़ गई।
इसके बाद सचिन अहीर का जाना उद्धव गुट के लिए 'जख्म पर नमक छिड़कने' जैसा साबित हुआ है। अहीर ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस और एनसीपी से की थी, लेकिन बाद में वह उद्धव सेना में शामिल हो गए थे और अब वह शिंदे सेना का हिस्सा बन चुके हैं। पार्टी के भीतर उठते इन सुरों से साफ है कि आगामी दिनों में उद्धव गुट के अंदर एक बड़ी आंतरिक कलह देखने को मिल सकती है।
Updated on:
01 Jul 2026 01:28 pm
Published on:
01 Jul 2026 01:27 pm
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