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Maharashtra: ठाकरे और शिंदे सेना की याचिकाओं पर सुनवाई 4 हफ्ते के लिए टली, सुप्रीम कोर्ट ने आज दिए यह अहम निर्देश

Supreme Court Shiv Sena Case: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई शुरू होने के बाद संविधान पीठ ने दोनों पक्षों को लिखित जानकारी देने का निर्देश दिया। इस मामले में सुनवाई शुरू करने से पहले संविधान पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से अपनी बात रखनी चाहिए।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Nov 01, 2022

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एकनाथ शिंदे की शिवसेना का 'मिशन मुंबई' तैयार!

Maharashtra Political Crisis: एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) गुट के अलग होने के बाद शिवसेना पर किसका हक है, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई चार हफ्ते के लिए टल गई है। देश की शीर्ष कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 29 नवंबर तय की गई है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने आज की सुनवाई में दोनों पक्षों से अपनी लिखित दलीलें पेश करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों और किन मुद्दों पर कौन से वकील बहस करेंगे, इसकी जानकारी देने का भी निर्देश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के सियासी घमसान से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की तारीख आगे बढ़ा दी है। यह भी पढ़े-Maharashtra: शरद पवार पर बीजेपी ने बोला हमला, कहा- राजनीति महाराज के नाम पर और गुणगान शहंशाह का!


सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई शुरू होने के बाद संविधान पीठ ने दोनों पक्षों को लिखित जानकारी देने का निर्देश दिया। इस मामले में सुनवाई शुरू करने से पहले संविधान पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से अपनी बात रखनी चाहिए। दोनों पक्षों के कनिष्ठ वकील दलील दे सकते हैं। हो सके तो दोनों पक्षों को एक संयुक्त बैठक करनी चाहिए और मुद्दों को तय करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ये मुद्दे कम होने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्येक पक्ष से यह निर्धारित करने के लिए भी कहा है कि कौन से पक्ष के वकील कौन से बिंदुओं पर बहस करेंगे। ताकि बहस करते समय एक ही मुद्दा बार बार नहीं आए। अदालत ने यह भी कहा कि लिखित तौर पर मुद्दों को देने से संविधान पीठ को सुनवाई करने और निर्णय लेने में मदद मिलती है।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वें संयुक्त रूप से लिखित में अपना पक्ष रखेंगे। इसके अलावा, सभी दस्तावेजों को भी संलग्न करेंगे। ताकि सुनवाई के लिए एक समान मुद्दा तय हो सके। कोर्ट ने इसके लिए चार हफ़्तों का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र के हालिया राजनीतिक संकट से जुड़ी कई याचिकाएं लंबित हैं। इन याचिकाओं में महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिंदे गुट और बीजेपी के गठबंधन को आमंत्रित करने के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के 30 जून के फैसले को और उसके बाद विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट को भी चुनौती दी गई है।