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बाल विवाह रोकने को आमजन में जागरूकता जरूरी: कलक्टर

जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने को आगे आए समाज, बाल विवाह पर मीडिया कार्यशाला का आयोजन
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नागौर

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Shyam Lal Choudhary

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Updated: 22 Jun 2018, 12:16 PM IST

nagaur hindi news

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नागौर. बाल विवाह को लेकर लोगों की सोच में बदलाव जरूरी है। यह एक सामाजिक बुराई है। समाज में बेटी को महत्व देने की जरूरत है। जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम ने सेंटर फॉर कम्युनिटी इकोनोमिक्स एंड डवलपमेंट कंसलटैंट सोसायटी (सिकोइडिकोन), यूएनएफपीए व महिला अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को बीकानेर रोड स्थित एक होटल में 'बाल विवाह मुक्त राजस्थान: एक साझा अभियान' विषय पर आयोजित कार्यशाला में यह बात कही। कलक्टर ने कहा कि राजश्री योजना में आर्थिक संबल प्रदान किया जाता है और गैर सरकारी संगठन भी काम कर रहे हैं।
कानून सम्मत नहीं है बाल विवाह
गौतम ने कहा कि समाज में यह बदलाव आना चाहिए कि बाल विवाह को गलत मानते हुए इसे रोकने के लिए लोग आगे आएं। बाल विवाह को लेकर दिए जाने वाले सारे तर्क गलत है और कानून सम्मत भी नहीं है। बाल विवाह का शून्यकरण भी किया जा सकता है। इस सामाजिक बुराई का अंत करने में मीडिया की अहम भूमिका हो सकती है, क्योंकि सामाजिक बदलाव लाने में मीडिया शसक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि अगर सामाजिक सहयोग मिलता है तो बालिकाएं भी आगे आकर बाल विवाह का विरोध करती हंै। बाल विवाह से बचपन खो जाता है। कम उम्र में शादी से कई जटिलताएं है। मीडिया यह बताए कि किस तरीके से यह समाज में बुराई है।

कानूनी परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन बनाएं
गौतम ने कहा कि बाल विवाह में मदद करने वाला भी दोषी होता है। जब कोई सहयोग नहीं करेगा तो इसमें कमी आएगी। हमें कानूनी परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन बनाने की जरूरत है। नागौर को बाल विवाह वाले जिले की श्रेणी से बाहर लाना है। लोग इस बात को स्वीकार करेंगे कि यह एक अपराध है तभी बाल विवाह रुकेगा। सोसायटी के कार्यकारी निदेशक मनीष सिंह ने राजस्थान में बाल विवाह की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में 18 साल से कम उम्र की आयु की 31.6 प्रतिशत लड़कियों का विवाह हो जाता है, जबकि राष्ट्रीय औसत 17 प्रतिशत है। राजस्थान के 14 जिलों में बाल विवाह की दर 31.6 प्रतिशत से अधिक है, जिनमें नागौर जिला भी शामिल हैं।
बालिकाओं को मिले प्रोत्साहन
मनीष सिंह ने कहा कि बाल विवाह में राजस्थान आगे है इसलिए कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को जागरूक कर बाल विवाह में कमी लाई जा सकती है। यह सरकार के लिए चिंता का विषय रहा है, इसलिए बाल विवाह को रोकने के लिए सबका सहयोग जरूरी है। यह कार्यक्रम लोगों में मानसिक बदलाव लाने की प्रक्रिया है, जिसमें मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है। मीडिया बदलाव के लिए प्रेरित करे तथा बाल विवाह का विरोध करने वाली बालिकाओं को भी प्रोत्साहन दिया जाए। बाल विवाह महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा में से एक है। सिकोइडिकोन के डिविजनल ऑफिसर (चाइल्ड मरीज) अनिल ने बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के बारे में जानकारी दी।
चिराली में नागौर पहले पायदान पर
यूएनएफपीए की राज्य सलाहकार दिव्या ने कहा कि बाल विवाह समाज के लिए अभिशाप है और बच्चों के विकास में बाधक है। लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना जरूरी है। महिलाएं भी इसके विरोध में आगे आ रही है, लेकिन उनको समाज का सहयोग भी जरूरी है। महिला अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक अनुराधा सक्सेना ने कहा कि राज्य में ***** आधारित भेदभाव एवं महिलाओं के प्रति हिंसा न करने तथा महिलाओं में जागृति लाने की दृष्टि व लेगिंग उत्पीडऩ रोकने के लिए राज्य में चल रही चिराली योजना में नागौर पहले स्थान पर है। जिला प्रशासन की ओर से शंखनाद शक्तिअभियान भी शुरू किया गया है। कार्यशाला में जिला मुख्यालय के प्रमुख समाचार पत्रों व न्यूज चैनलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और बाल विवाह मुक्त राजस्थान बनाने के लिए सुझाव दिए।