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‘स्वतंत्र शब्द अपने आप में महत्वपूर्ण है’

पौषधशाला में चल रहा चातुर्मास

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नागौर. स्वतंत्र शब्द अपने आप में महत्वपूर्ण है। स्व यानी आत्मा और तंत्र यानी शासन। अपनी आत्मा पर स्वयं का शासन करना वास्तव में स्वतंत्रता है। देश तो स्वतंत्र हो गया, परन्तु आत्मा अभी तक मोह का गुलाम बना हुआ है। मोह के साम्राज्य में कर्म जंजीरों से जकड़ा हुआ हर एक जीव स्वतंत्र नहीं है। यह बात श्री अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ तत्वाधान में श्री जयमल जैन पौषधशाला में चल रहे चातुर्मास के दौरान समणी डॉ.सुयशनिधि ने कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थिति को दर्शाते हुए कहा कि व्यक्ति स्वतंत्र की बजाय स्वच्छंद होता जा रहा है, जिसका परिणाम यह है कि संस्कारों एवं संस्कृति से विमुख होता जा रहा है। समणी सुगमनिधि ने बड़ी साधु वंदना की कडियों का विवेचन किया।

नाटक की प्रस्तुति
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामूहिक लाल वर्ण एकासन तप आयोजन में माज के लोगों ने भाग लिया। इस दौरान 16 सती आराधना तप का पारणा हुआ जिनकी अनुमोदना अनेक श्रावक श्राविकाओं ने की। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में जय जैन बालिका मंडल कि ओर से पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया पर विशेष नाटिका प्रस्तुत की गई। इस दौरान अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ। समणी सुधननिधि, समणी सुयोगनिधि, समणी श्रद्धानिधि की सानिध्य में स्वतंत्रता दिवस कार्यकम को भक्ति भावना से मनाया गया। प्रवचन की प्रभावना के लाभार्थी शांति देवी पत्नी मालचंद, नरपतचंद, जितेंद्र कुमार ललवानी रहें। दर्शन प्रतिमा के लाभार्थी साधर्मिक महानुभाव रहें। बुधवार को पुछे गए प्रश्नों के जवाब मंजू लोढ़ा, रीता ललवानी, सुनील ललवानी रहे। गुरुवार को प्रवचन की प्रभावना के लाभार्थी लालचंद, राजेंद्र कुमार, निर्मल कुमार ललवानी रहे। दर्शन प्रतिमा के लाभार्थी अमित कुमार, सुमित कुमार ललवानी रहें। प्रवचन में पुछे गए प्रश्नों के जवाब सरोज देवी चोरडयि़ा, प्रीतम ललवानी, गौतमचंद बाघमार ने दिए।

तेज धूप व गर्मी से सोलह बच्चों की तबीयत बिगड़ी

नावां शहर. स्वतंत्रता दिवस समारोह के दिन तेज धूप व उमस के कारण स्टेडियम में सामुहिक समारोह के बाद दो विद्यालयों के करीब सोलह बच्चों की तबीयत खराब हो गई। विद्यालय संचालकों ने बच्चों को उपचार के लिए नावां के सामुदायिक चिकित्सालय पहुंचाया। बच्चों के तबीयत बिगडऩे का कारण काफी घंटे दूम व उमस भर माहौल में बैठना बताया गया है। चिकित्सक रामदेव दूण ने बताया कि तेज धूप होने व बच्चें भूखे होने के कारण बच्चें डी हाइड्रेशन के शिकार हो गए थे। उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय उपचार दिया गया।