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पहले मेलों में घूमने आते थे हजारों पर्यटक, अब विभाग की अनदेखी से हुए कम

नागौर के तीन राज्य स्तरीय पशु मेले भी हैं पर्यटन के केन्द्र

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Nagaur's three state level cattle fairs are also centers of tourism

Nagaur's three state level cattle fairs are also centers of tourism.

नागौर जिले में पर्यटन उद्योग की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता एवं लापरवाही के कारण जिले में पर्यटकों की संख्या बढऩे की बजाए कम हो रही है। पहले जहां नागौर जिले में सबसे अधिक विदेशी पर्यटक राज्य स्तरीय पशु मेलों (श्री रामदेव पशु मेला नागौर, श्री बलदेवराम पशु मेला, मेड़ता एवं वीर तेजाजी पशु मेला, परबतसर) के दौरान देखने को मिलते थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जैसे-जैसे पशुओं की संख्या कम होने लगी, इन मेलों में पर्यटकों की भी संख्या कम होती जा रही है। जबकि पशुपालन विभाग से जुड़े पुराने अधिकारियों एवं कर्मचारियों का कहना है कि पहले मेला मैदान में राजस्थान पर्यटन विकास निगम की ओर से पर्यटकों के रहने के लिए टेंट लगाकर व्यवस्था की जाती थी, जिससे विभाग को अच्छी आमदनी होती और पर्यटक भी मेले के बीच रुककर मेले का आनंद उठाते थे। समय के साथ विभागीय अधिकारी उदासीन हो गए और मेलों मेंं पर्यटकों की संख्या घटने लगी।
हालांकि पर्यटन विभाग से जुड़े अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि पशु मेलों में विदेशी पर्यटक काफी संख्या में आते हैं, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पहले पर्यटन विभाग एवं राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) की ओर से पर्यटकों को बुलाने के लिए जो प्रयास एवं प्रचार-प्रसार किए जाते थे, वे अब नहीं होते।
गौरतलब है कि मोहम्मद यूनुस समिति की सिफारिश पर 4 मार्च 1989 को पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने वाला राजस्थान भारत का प्रथम राज्य था। राज्य सरकार के पर्यटन विभाग ने पर्यटन की दृष्टि से राजस्थान को 9 सर्किट एवं एक परिपथ में विभाजित किया था। राज्य में दो पर्यटन त्रिकोण हैं, जिनमें दिल्ली-आगरा-जयपुर को स्वर्णिम त्रिकोण तथा मरू त्रिकोण में जैसलमेर-बीकानेर-जोधपुर को शामिल किया गया है। मरू त्रिकोण में यदि नागौर को भी शामिल कर लिया जाए तो यहां के पर्यटन स्थलों की रौनक बढ़ सकती है।

ये हैं पर्यटन सर्किट
मरू सर्किट - जैसलमेर- बीकानेर- जोधपुर- बाड़मेर
शेखावाटी सर्किट - सीकर- झुंझुनू
ढुंढ़ाड़ सर्किट - जयपुर- दौसा- आमेर-
ब्रज मेवात सर्किट - अलवर- भरतपुर- सवाईमाधोपुर- टोंक
हाड़ौती सर्किट - कोटा - बुंदी - बारा - झालावाड़
मेरवाड़ा सर्किट - अजमेर - पुष्कर - मेड़ता - नागौर
मेवाड़ सर्किट - राजसमंद, चित्तौडगढ़़, भीलवाड़ा
वागड़ सर्किट - बांसवाड़ा - डूंगरपुर
गौडवाड़ सर्किट - पाली - सिरोही - जालोर

नागौर में पर्यटन की अपार संभावनाएं
ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से नागौर का इतिहास काफी मजबूत एवं रोचक रहा है। नागौर, खींवसर, कुचामन के प्राचीन किले, यहां के प्राचीन मंदिर एवं मेलों की प्रसिद्धी देश-विदेश तक है। साथ ही मरू त्रिकोण से सटा होने तथा मेरवाड़ा सर्किट से जुड़ा होने के कारण यहां थोड़े-से प्रयास से पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयां प्रदान कर सकते हैं। गौरतलब है कि राजस्थान में सर्वाधिक पर्यटक माउण्ट आबू व पुष्कर में आते हैं, पुष्कर शहर न केवल नागौर जिले से जुड़ा है, बल्कि मेरवाड़ा सर्किट में पुष्कर के साथ नागौर के मेड़ता व नागौर को भी जोड़ा हुआ है, ऐसे में यदि मेड़ता-पुष्कर को रेल लाइन से सीधा जोड़ दिया जाए तो पर्यटन उद्योग की सूरत बदल सकती है। साथ ही जिले के धार्मिक स्थलों को जोडकऱ धार्मिक सर्किट भी बनाया जा सकता है।

आरटीडीसी नहीं करता ठहरने की व्यवस्था
पहले जहां नागौर के रामदेव पशु मेले में विदेशी पर्यटकों को ठहराने के लिए आरटीडीसी की ओर से टेंट लगाकर विशेष व्यवस्था की जाती थी, लेकिन अब पिछले कई वर्षों से नहीं की जा रही है। मेला मैदान में बना आरटीडीसी का कुरजां होटल भी मवेशियों का अड्डा बना हुआ है। इसके साथ पर्यटन विभाग की ओर से मेले में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम भी खानापूर्ति वाले बनकर रह गए हैं।

नागौर में नियुक्त करवाएंगे अधिकारी
नागौर जिले के पर्यटन केन्द्रों का प्रचार-प्रसार करने व यहां पर्यटकों को लाने के लिए सरकार के स्तर पर पूरे प्रयास किए जाएंगे। यदि नागौर में पर्यटन विभाग का कार्यालय स्वीकृत है तो इस सम्बन्ध में मैं खुद बात करके जल्द ही अधिकारी नियुक्त करवाने का प्रयास करूंगी।
- डॉ. मंजू बाघमार, राज्य मंत्री, राजस्थान सरकार