
बेटी के जन्म पर परिवार ने मनाया ऐसा जश्न, पूरे देश में पेश की अनोखी मिसाल
वैसे तो हम अकसर देश के विद्वानों के बयानों में बेटे और बेटी के बीच बराबरी की बातें सुनते रहते हैं, लेकिन असल में आज भी कई लोग बेटों को बेटियों से अच्च मानते हैं। इसका उदाहरण उस समय देखने को मिलता है, जब किसी घर में बेटे का जन्म हो। अकसर लोग बेटे के जन्म के समय खुशियां मनाते नजर आते हैं तो वहीं बेटी के जन्म पर कई घरों में आज भी उत्साह कम ही देखने को मिलता है। लेकिन, हमारे समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो बेटियों को भी बेटों से बढ़कर भगवान की ओर से दी गई सौगात मानते हैं और उनके जन्म पर जमकर खुशियां मनाते हैं।
इस बात का सटीक उदाहरण देखने को मिला मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में। यहां रहने वाले डॉ गुंजन जैन और उनका परिवार जिन्होंने समाज के सामने मिसाल पेश की है। इस परिवार में बेटी का जन्म हुआ तो सदस्यों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने बेटी के जन्म को जोरदार उत्सव के रूप मनाकर सिर्फ शहर या राज्य को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को एक अहम संदेश दिया है। संदेश भी ऐसा, जिसे देखने वाले बस देखते ही रह गए।
सामाजिक ताने-बाने को खास संदेश
बता दें कि, डॉक्टर गुंजन जैन ने अपनी बेटी के जन्मोत्सव को यादगार बनाने के लिए 'बेटी अभिशाप नहीं वरदान है' नाम का संदेश देने के लिए गाजे बाजे के साथ पूरे शहर में पुष्प वर्षा करते हुए यात्रा निकाली और इस तरह इन्होंने अपनी बेटी का गृह प्रवेश कराया। नगर भ्रमण के दौरान उनके काफिले की सभी गाड़ियों पर 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ', 'बेटी है तो कल है' और 'बेटियां दो वंशों की जीवन दायिनी' आदि संदेश लिखे पोस्टर लगाए गए थे, ताकि लोगों में बेटे और बेटी के बीच समानता का संदेश पहुंचाया जा सके। यह यात्रा जहां-जहां से गुजरी, वहां स्वागत और उत्सव यात्रा देख सभी लोगों ने जैन दंपति के इस कार्य की सराहना करते दिखे।
पहले से भी डाक्टर गुंजन की एक बेटी है
गौरतलब है कि, समाज को प्रेरणादायक, मिशाल पेश करने वाले बेटियां के पिता डाक्टर गुंजन जैन उद्योग विभाग नर्मदापुरम में सहायक संचालक है। जिनके यहां बड़ी बेटी वैदेही के बाद दूसरी लक्ष्मीरूपा बेटी का जन्म 19 सितंबर को हुआ था।
Published on:
25 Sept 2023 08:50 pm
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