26 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

AAP के बिखरने पर बदले राजनीतिक समीकरण, क्या पंजाब में कांग्रेस को होगा फायदा?

AAP crisis: AAP में टूट से BJP को राज्यसभा में ताकत मिली है। इसके बाद से राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। पंजाब की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिलेगा।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Harshita Saini

Apr 26, 2026

aap crisis impact on punjab politics bjp vs congress

AAP में दरार से बीजेपी को मिली राज्य सभा में मजबूती ( सोर्स-IANS)

AAP crisis: हाल ही में आम आदमी पार्टी में अंदरूनी दरार के चलते काफी बदलाव देखने को मिले हैं। राघव चड्ढा समेत 7 सांसद आम आदमी पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। इसके चलते काफी राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। दरअसल आम आदमी पार्टी में पिछले कुछ समय से टकराव देखा जा रहा था। राज्य सभा में राघव चड्ढा को पद से हटाने के बाद से पार्टी चर्चा में बनी हुई थी। राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ खुलकर नाराजगी भी जताई थी। इसके बाद सांसदों का अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो जाना एक सोचा समझी रणनीति लग रही है।

पंजाब में AAP की स्थिति

दिल्ली में हार के बाद अरविंद केजरीवाल ने अपना पूरा फोकस पंजाब पर कर दिया था। यही एक राज्य है जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है। अगले साल पंजाब में चुनाव होने वाले हैं और इसी बीच पार्टी के बीच टूट देखने को मिली है। 2022 में राघव चड्ढा ने यहां पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि 2025 में मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्हें हटा दिया गया था। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इन सांसदों के पार्टी छोड़ देने से पार्टी कमजोर होगी। हालांकि भगवंत मान ने इसे नकारते हुए कहा कि अलग-अलग मसालों से मिलकर सब्जी बनती है, अकेले मसाले से नहीं- यानी कुछ नेताओं के जाने से पार्टी पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

क्या कांग्रेस को हो सकता है फायदा?

आम आदमी पार्टी की इस फूट के चलते पंजाब में पार्टी की छवि पर असर पड़ा है। इसका फायदा कांग्रेस उठा सकती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 23% से ज्यादा था, जिसका मतलब है कि पार्टी का आधार अभी भी मजबूत है। अगर कांग्रेस अपने अंदरूनी मतभेदों को नियंत्रित कर लेती है, तो AAP की कमजोरी से पार्टी को सीधा-सीधा फायदा मिल सकता है।

राज्य सभा में BJP को मिली मजबूती

राघव चड्ढा के साथ पार्टी के 10 में से 7 सांसदों ने पार्टी को छोड़ने का फैसला लिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव ने साफ कहा कि दो-तिहाई सांसदों ने मिलकर संविधान के नियमों के तहत BJP के साथ जाने का फैसला लिया है। एक साथ सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से बीजेपी को राज्य सभा में मजबूती मिली है। राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल ने पार्टी को छोड़ा है। आपको बता दें कि अशोक मित्तल, जिन्हें हाल ही में चड्ढा की जगह उपनेता बनाया गया था, वह भी इस फैसले में उनके साथ खड़े नजर आए हैं।

BJP की रणनीति

BJP अब पंजाब में अपनी पकड़ जमाने की पूरी कोशिश कर रही है। पहले पार्टी शिरोमणि अकाली दल के साथ थी, लेकिन किसान कानूनों के मुद्दे पर दोनों का साथ टूट गया। उसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं जैसे अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ को अपने साथ जोड़ लिया। अब राघव चड्ढा के आने से गणित में बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन अगर आंकड़ों की बात करें तो अभी पार्टी बहुत मजबूत नहीं दिखती- 2017 में 3 सीटें मिली थीं और 2022 में सिर्फ 2 सीटें। फिर भी बीजेपी को उम्मीद है कि वह वेस्ट बंगाल जैसा प्रदर्शन पंजाब में कर सकती है। जहां पार्टी ने 2016 में सिर्फ 3 सीटें जीती थीं, लेकिन 2021 तक यह संख्या बढ़कर 77 हो गई और उसका वोट शेयर भी 10.3% से बढ़कर 38.4% तक पहुंच गया था।