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No Fuel: हॉर्मुज बंद का असर या कुछ और? आंध्र प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर डीजल के लिए ‘नो स्टॉक’ बोर्ड से हड़कंप

Petrol-Diesel Shortage: विशाखापत्तनम समेत कई इलाकों में डीजल की भारी कमी से हालात बिगड़ गए हैं। वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। डीलरों का कहना है कि तेल कंपनियां नियमित सप्लाई नहीं दे रहीं, जिससे मांग बढ़ने के बावजूद स्टॉक की कमी बनी हुई है।

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भारत

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Mukul Kumar

Apr 26, 2026

petrol diesel shortage

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फाइल फोटो- पत्रिका)

हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने का असर दुनिया भर में देखने को मिल रहा है। इसकी एक छोटी झलक भारत के आंध्र प्रदेश में भी देखने को मिली है। जहां कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की भारी किल्लत हो गई है। जिसने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

पिछले दो दिनों से कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि कई स्टेशनों पर 'नो स्टॉक' के बोर्ड लग गए हैं। लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं।

किन इलाकों में सबसे ज्यादा दिखा असर?

विशाखापत्तनम और आसपास के इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। रोजमर्रा का काम करने वाले वाहन चालकों से लेकर ट्रांसपोर्ट कारोबार तक, सभी प्रभावित हैं।

पेट्रोल डीलरों का कहना है कि तेल कंपनियां नियमित सप्लाई नहीं दे पा रही हैं। आरोप है कि कई जगह हर दो दिन में ही स्टॉक भरा जा रहा है, जिससे मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

आंध्र पेट्रोलियम एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में डीजल की मांग अचानक बढ़ी है, लेकिन सप्लाई उस हिसाब से नहीं हो पा रही है।

प्रशासन से बैठकें, फिर भी समाधान नहीं

डीलर्स एसोसिएशन ने बताया कि इस समस्या को लेकर सिविल सप्लाइज कमिश्नर के साथ बैठक भी हुई, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

कमिश्नर ने तेल कंपनियों और डीलरों के बीच समन्वय बनाने की कोशिश की, लेकिन जमीनी हालात नहीं बदले। कई पेट्रोल पंपों पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।

‘जल्द सुधार की उम्मीद’

गोपाल कृष्ण ने कहा कि स्थिति को सुधारने की कोशिश की जा रही है और उम्मीद है कि जल्द हालात सामान्य होंगे। लेकिन फिलहाल डीजल की कमी बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सप्लाई नियमित नहीं हुई तो कई पेट्रोल पंपों को संचालन बंद करने की नौबत आ सकती है।

डीलरों का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कंपनियों पर 30 से 40 रुपये प्रति लीटर तक का दबाव पड़ रहा है। इसी वजह से सप्लाई प्रभावित हो रही है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसका असर जमीनी स्तर पर साफ दिख रहा है।

केंद्र सरका ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं

इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर खरीदारी न करें।

सरकार का कहना है कि घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और रिटेल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर

यह संकट उस समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ सकता है।