
भगवंत मान और राघव चड्ढा। (सोर्स- एक्स)
आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में विलय के बाद पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले ने सियासी माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है।
इस मुद्दे को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे और पूरे मामले को उनके सामने रखेंगे।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। उनका कहना है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को इस तरह दूसरी पार्टी में मिलाना जनता के विश्वास के साथ धोखा है। मान ने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है।
आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद भाजपा जनता पार्टी (AAP MPs merger BJP) में शामिल हो गए हैं। वहीं, बीजेपी ने भी इस मुद्दे पर सीधे तौर पर पुष्टि कर दी है। उधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा होने से संसद में ताकत का संतुलन प्रभावित होगा।
भगवंत मान ने कहा कि वह राष्ट्रपति से मिलकर इस मामले में संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि इस तरह के विलय को लेकर स्पष्ट नियम हैं और उनका पालन होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह राष्ट्रपति से अनुरोध करेंगे कि इस मामले की जांच कराई जाए और अगर कोई नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई हो।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि अगर सांसद बिना उचित प्रक्रिया के पार्टी बदलते हैं, तो यह दल-बदल कानून का उल्लंघन हो सकता है। कई नेताओं ने इसे 'राजनीतिक दबाव' और 'सत्ता का दुरुपयोग' करार दिया है।
इस पूरे विवाद का असर पंजाब की राजनीति पर भी पड़ सकता है। भगवंत मान की सरकार पहले ही कई मुद्दों को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। ऐसे में यह नया विवाद सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि, आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि पार्टी मजबूत है और इस तरह की खबरों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
अब सबकी नजर 5 मई पर टिकी है, जब भगवंत मान राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। इस बैठक के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
Updated on:
29 Apr 2026 03:29 pm
Published on:
29 Apr 2026 03:27 pm
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