
CJP फाउंडर अभिजीत दीपके। (Photo- ANI)
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि 15 अगस्त से पूरे देश में 'स्कूल ठीक करो' अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने लाने के साथ ही उनमें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई जाएगी।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी गांवों के बच्चों को स्कूलों में बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। उन्होंने इसे देश के लिए शर्मनाक स्थिति बताते हुए कहा कि ग्रामीण बच्चों की उम्मीदों और जरूरतों को पूरा करने में व्यवस्था विफल रही है। उन्होंने कहा कि 'स्कूल ठीक करो' अभियान के जरिए ग्रामीण सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी और व्यवस्था से उनमें सुधार की मांग की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से सामने आई एक घटना का भी दीपके ने जिक्र किया। यहां अपने स्कूल तक पक्की सड़क बनवाने की मांग को लेकर करीब 300 स्कूली बच्चों और 100 अभिभावकों ने विरोध मार्च निकाला। गंगवा का डेरा और बच्ची का डेरा गांव के प्राथमिक कक्षाओं के छात्र हाथों में तिरंगा और बैनर लेकर करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर हमीरपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे। बच्चों के इस प्रदर्शन का समर्थन करते हुए दीपके ने कहा कि अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे बच्चों को सलाम है। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क की मांग करनी पड़ रही है।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके इससे पहले 'क्या बोलती पब्लिक' नाम से जनसंपर्क अभियान शुरू करने का ऐलान कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अभियान के जरिए आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों को समझा जाएगा और उन मुद्दों को सामने लाया जाएगा, जिनका सीधा असर परिवारों की जिंदगी पर पड़ता है।
दीपके ने निजी स्कूलों की बढ़ती फीस को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि कई निजी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का खर्च सामान्य आय वाले परिवारों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। पहली कक्षा से ही कई स्कूलों में फीस लाखों रुपए तक पहुंच रही है। इसके अलावा एडमिशन फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य खर्च अलग से वहन करने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूलों के साथ-साथ कॉलेज और कोचिंग संस्थानों की फीस भी लगातार बढ़ रही है। बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए कई माता-पिता कर्ज लेने तक को मजबूर हैं। दीपके के मुताबिक, पैसों की कमी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए और शिक्षा परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं बननी चाहिए।
Updated on:
12 Aug 2026 12:18 pm
Published on:
12 Aug 2026 12:18 pm
