
सामने आई अमित मालवीय की विदाई की इनसाइड स्टोरी। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज
Action on Amit Malviya BJP IT Head: बीजेपी की नेशनल टीम की कल घोषणा होने के बाद से सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि पिछले 11 साल से आईटी हेड की जिंम्मेदारी संभाल रहे अमित मालवीय की विदाई क्यों हुई? मालवीय को 2015 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कार्यकाल में आईटी सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह पार्टी का एक प्रमुख और स्थापित चेहरा बन गए थे, जिसे रिप्लेस करना लगभग नामुमकिन नजर आ रहा था। वैसे, भाजपा इस तरह के चौंकाने वाले फैसलों के लिए पहचानी जाती है, लेकिन बताया जा रहा है कि अमित की विदाई न कोई सामान्य फैसला है और न ही यह दूसरे चेहरों को सामने लाने की कवायद। यह एक ऐसा कठोर निर्णय है, जो पार्टी आलाकमान को मजबूरी में लेना पड़ा है।
अमित मालवीय की कार्यशैली भले ही बीजेपी की रणनीति के अनुरूप रही, लेकिन उनके शब्दों ने एक बड़े वर्ग को आहत किया और इस बड़े ‘वर्ग’ में जब RSS विचारक रतन शारदा का नाम जुड़ा, तो मालवीय के सितारे खुद गर्दिश की तरफ बढ़ चले। शारदा ने लोगों को ट्रोल करने के लिए मालवीय की खुलकर आलोचना की और इसे ‘गंभीर समस्या’ बताया। दरअसल, हुआ ये था कि आम बजट 2024 के बाद मालवीय अपने अंदाज में विरोधियों को जवाब दे रहे थे। उन्होंने प्रॉपर्टी की बिक्री में इंडेक्सेशन खत्म करने के निर्मला सीतारमण के फैसले का विरोध’ करने वालों को चुनौती देते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा था - आज रात हर कोई इंडेक्सेशन का विशेषज्ञ बन गया है। हालांकि, बाद में उन्होंने इसे डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक रिएक्शन की आग फैल चुकी थी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शारदा ने पोस्ट किया - #BJP IT सेल का यह रवैया एक गंभीर समस्या है। #Budget2024 की अच्छी बातों के बारे में आसान भाषा में जानकारी देने के बजाय, वे नागरिकों को ट्रोल करने लगते हैं। प्रिय अमित मालवीय जनता के डर का जवाब दें, उनका अपमान न करें। इस घटना ने मालवीय से नाराजगी रखने वाले नेताओं की संख्या में इजाफा किया और ये नाराजगी भाजपा से होते हुए आरएसएस तक पहुंच गई।
हालांकि, उस वक्त अमित मालवीय के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही आलाकमान ने उन्हें कोई स्पष्ट चेतावनी दी। लेकिन अंदर ही अंदर मालवीय के खिलाफ गुस्सा जरूर बढ़ता गया। मालवीय पर कई बार झूठ फैलाने के आरोप लगे। पार्टी का एक वर्ग यह मानने लगा था कि इससे बीजेपी की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। कुल मिलाकर अमित मालवीय के प्रति नाराजगी का ‘प्रेशर कुकर’ असंतोष की आंच पर चढ़ चुका था, बस इंतजार था एक सीटी बजने का और Gen Z प्रोटेस्ट ने वो काम कर दिया। बीजेपी के प्रति युवाओं की नाराजगी को आलाकमान ने गंभीरता से लिया और उसे अमित मालवीय की वो खामियां खुलकर दिखाई देने लगीं, जो अब तक केवल RSS विचारक रतन शारदा जैसे लोगों को नजर आ रही थीं। ‘प्रेशर कुकर’ की सीटी बज गई थी, अब समय था कुकर को आंच से उतारकर भाप निकालने का और बीजेपी ने यही किया।
वैसे अमित मालवीय के साथ आरएसएस के बेहद करीबी और बीजेपी के पूर्व सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी का भी पंगा चर्चा में रहा है। स्वामी का आरोप है कि अमित ने फेक ट्वीट्स के जरिए उनके खिलाफ कैंपेन चलाया था। स्वामी ने इसे लेकर बीजेपी के उच्च अधिकारियों से अमित मालवीय को हटाने को भी कहा था। पर पार्टी ने उस समय अमित पर कोई एक्शन नहीं लिया था। माना जा रहा है कि स्वामी ने अमित मालवीय को लेकर संघ से भी कड़े शब्दों में शिकायत की थी। इस तरह लगातार संघ के कई करीबियों में अमित मालवीय को लेकर जो असंतोष था वो शायद नितिन नबीन तक पहुंचाया गया और उसी के परिणामस्वरूप बीजेपी की नई टीम से उन्हें रुखसत होना पड़ा।
मालवीय की विदाई से कई नेता खुश हैं, खासकर वे जिन्हें लगता है कि हर समय आक्रामकता नहीं चलती, थोड़ा तर्क भी होना चाहिए। मालवीय ‘नैरेटिव सेटिंग’ में माहिर हैं और उनकी इस काबिलियत पर शायद ही किसी को शक हो, लेकिन उनके शब्दों का चयन कई बार कुछ ज्यादा ही रूथलेस यानी निर्मम हो जाया करता था, जो उनके खिलाफ गया।
वैसे भी आजकल देश का जो माहौल है, उसमें शब्दों की मर्यादा का चीरहरण करने वाले नेताओं के लिए आगे ही राह आसान नहीं होगी। मालवीय की जगह दीपक म्हास्के को आईटी सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उम्मीद है कि नए आईटी चीफ शब्दों की मर्यादा का ख्याल रखेंगे।
Updated on:
18 Aug 2026 01:14 pm
Published on:
18 Aug 2026 12:30 pm
