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‘वंदे मातरम की पूरी गरिमा को बहाल करने में करीब 80 साल लग गए’, राष्ट्रीय गीत को लेकर अमित शाह ने ऐसा क्यों कहा?

Hindi Diwas 2026: हिंदी दिवस और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में अमित शाह ने कहा कि मातृभाषा के अलावा दूसरी भारतीय भाषा सीखने का विरोध करना गलत है। उन्होंने वंदे मातरम के लिए कहा कि इसकी पूरी चगिमा बहाल करने में 80 साल लग गए।
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Amit Shah On Hindi Diwas 2026

गृह मंत्री अमित शाह (फोटो-IANS)

Amit Shah Speech On Hindi Diwas: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में छात्रों को अपनी मातृभाषा के अलावा एक और भारतीय भाषा सीखने के प्रावधान का विरोध करने वालों पर निशाना साधा है। छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इसका विरोध करना 'पाप' है। शाह ने स्पष्ट कहा कि इस नीति का मकसद किसी एक भाषा को थोपना नहीं, बल्कि देश के लोगों को एक-दूसरे की भाषाओं और संस्कृतियों से परिचित कराना है। साथ ही उन्होंने वंदे मातरम को लेकर भी एक बड़ा बयान दिया है।

वंदे मातरम को लेकर कही बड़ी बात

अमित शाह ने सोमवार को नवी मुंबई के CIDCO Exhibition Centre में हिंदी दिवस और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की पूरी गरिमा को बहाल करने में करीब 80 साल लग गए। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है और आज भी देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है।

भाषाई विविधता को बताया देश की ताकत

शाह ने भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए कहा कि इसका मतलब अपनी संस्कृति और इतिहास के बारे में जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि भाषाई विविधता को विभाजन की वजह नहीं, बल्कि देश की ताकत के रूप में देखा जाना चाहिए।

महाराष्ट्र की भाषाई विविधता का किया जिक्र

अमित शाह ने महाराष्ट्र की भाषाई विविधता की भी चर्चा की और इसे देश का एकमात्र बहुभाषी राज्य बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की धरती पर कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़ और वारली जैसी अलग-अलग भाषाएं फली-फूली हैं और उन्हें सम्मान व स्वीकार्यता मिली है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मराठी की समृद्ध साहित्यिक और ऐतिहासिक विरासत को पहचानते हुए उसे शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। उनके अनुसार, भारतीय भाषाओं और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का उद्देश्य है।

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