
BRICS समिट पर कपिल सिब्बल का बयान। फोटो में पीएम मोदी, चीन के प्रेसिडेंट जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन (सोर्स- आईएएनएस)
India-China BRICS Summit: भारत की मेजबानी ब्रिक्स समिट खत्म हो चुका है। अब इसके नतीजों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। निर्दलीय राज्यसभा सांसद और वकील कपिल सिब्बल ने समिट को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि इस बैठक का सबसे ज्यादा फायदा चीन को हुआ। हालांकि, उन्होंने भारत के लिए कुछ फैसलों को कामयाबी भी बताया।
सिब्बल ने ‘ब्रिक्स’ (BRICS) को अलग-अलग हितों वाले देशों का ग्रुप बताया। उनके मुताबिक, ऐसे समूह से किसी एक मुद्दे पर पक्का और ठोस फैसला निकालना आसान नहीं होता। उन्होंने भारत की अध्यक्षता के दौरान बिना विवाद के संयुक्त बयान जारी होने को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
कपिल सिब्बल ने कहा कि BRICS को लेकर अलग-अलग देशों की अपनी प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने चीन और रूस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा ये दोनों देश BRICS को पश्चिमी देशों के विकल्प के तौर पर मजबूत करना चाहते हैं। सिब्बल ने RIC यानी रूस, ईरान और चीन के बीच बढ़ती नजदीकी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत को किसी ऐसे गुट का हिस्सा नहीं बनना चाहिए, जिसे पश्चिम विरोधी गठबंधन के तौर पर देखा जाए।
भारत के लिए संयुक्त बयान पर सहमति बनाना आसान नहीं था। क्योंकि भारत के लिए ये बिल्कुल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने जैसी चुनौती थी। लेकिन अलग-अलग विचारों के बावजूद सभी देशों का एक बयान पर सहमत होना भारत की कूटनीतिक क्षमता को दिखाता है।
सिब्बल ने नई दिल्ली डिक्लेरेशन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसमें वैकल्पिक करेंसी और डी-डॉलराइजेशन को लेकर कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ। सिर्फ डिक्लेरेशन जारी कर देना काफी नहीं है। असली सवाल यह है कि इन फैसलों को जमीन पर कितना लागू किया जाता है।
बता दें नई दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें ग्लोबल गवर्नेंस, ट्रेड, सप्लाई चेन और आर्थिक सहयोग शामिल रहे। समूह ने लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया। स्टार्टअप्स और संक्रामक बीमारियों से निपटने पर भी चर्चा हुई। BRICS में दुनिया की कई बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। ऐसे में इसका वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। सदस्य देशों ने मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर ग्लोबल गवर्नेंस की जरूरत बताई। ट्रेडिंग सिस्टम को मजबूत करने की बात भी सामने आई। इसमें चीन की भागीदारी भी ज्यादा है। ग्रुप के कई साथी देश उसके साथ ट्रेड करना चाहते हैं। ईरान पहले से ही ज्यादा व्यापार करता है। ऐसे में सिब्बल के बयान ने एक अलग सवाल खड़ा कर दिया है। क्या BRICS की बढ़ती ताकत का फायदा भारत को ज्यादा मिला या चीन को…
Updated on:
14 Sept 2026 04:16 pm
Published on:
14 Sept 2026 04:14 pm
