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Bihar Flood: बाढ़ पीड़ितों की हालत देख भड़के पप्पू यादव, बोले- मेरे पास सरकार से ज्यादा पैसा, राहत नहीं मिली तो सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा

Bihar Flood: बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सरकार, अधिकारियों और ठेकेदारों पर हमला बोला। उन्होंने राहत सामग्री, सामुदायिक रसोई, नावों की व्यवस्था और एंटी-इरोजन कार्यों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बाढ़ बचाव के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है।
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पटना

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Anand Shekhar

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Updated: 13 Sep 2026, 6:28 PM IST

pappu yadav vaishali boat accident

पप्पू यादव (फोटो- pappu yadav FB)

Pappu Yadav on Bihar Flood: बिहार के कई जिलों में बाढ़ से मची तबाही के बीच पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ग्राउंड जीरो पर उतरकर पीड़ितों की मदद कर रहे हैं। वे बाढ़ प्रभावित अलग-अलग इलाकों में जाकर राहत सामग्री और नकद पैसे बांट रहे हैं। कटिहार के ऐसे ही एक दौरे के दौरान पीड़ितों की हालत देखकर सांसद का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर गरीबों तक तुरंत राहत नहीं पहुंची, तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

पप्पू यादव ने कहा, "मेरे पास उतने पैसे हैं, जितना सरकार चाहे तो हम दे देंगे। लेकिन इन गरीब लोगों तक पॉलिथीन, दवा, पीने का साफ पानी और छोटे बच्चों के लिए दूध पहुंचा दो।" उन्होंने कहा कि सरकार को खुद यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राहत सामग्री प्रभावित लोगों तक पहुंचे। पप्पू यादव पहले भी बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद और राहत सामग्री बांट चुके हैं।

पप्पू यादव ने पीड़ितों का दर्द किया बयां

बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए पप्पू यादव ने एक गर्भवती महिला का उदाहरण दिया जिसे लगभग नौ किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। उन्होंने 103 डिग्री बुखार से पीड़ित छह दिन के बच्चे का भी जिक्र किया और बताया कि इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के बीच बच्चे, महिलाएं और बुज़ुर्ग बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।

पप्पू यादव ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में कम्युनिटी किचन के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कम्युनिटी किचन बड़े पैमाने पर संसाधनों के दुरुपयोग का जरिया बन गए हैं। कई जगहों पर लोगों को समय पर खाना नहीं मिल रहा है, मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध नहीं है और बच्चे दोपहर तक भूखे रहने और गंगा व कोसी नदियों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने इन कम्युनिटी किचन में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की।

तटबंधों के टूटने पर सवाल

नौगछिया में चार तटबंधों के टूटने का मुद्दा उठाते हुए पप्पू यादव ने सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि साधुपुर के आगे कटाव-रोधी और पत्थर-पिचिंग के काम के लिए 62 ठेकेदारों को लगाया गया था। सभी 62 ठेकेदारों की सूची होने का दावा करते हुए, उन्होंने कहा कि वे उनसे इतनी सख्ती से निपटेंगे कि 'भगवान भी कांप उठेंगे।' उन्होंने इसमें शामिल ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

बाढ़ नियंत्रण के नाम पर लूट के आरोप

पप्पू यादव ने बाढ़ राहत और कटाव-रोधी कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने ठेकेदारों, अधिकारियों और राजनेताओं पर सरकारी धन के गबन के लिए मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ से बचाव के लिए भारी मात्रा में पत्थर लगाने के बावजूद, बाढ़ और कटाव की समस्या बनी हुई है। पप्पू यादव ने पिछले 40 वर्षों में चलाए गए बाढ़ राहत, कटाव-रोधी और बाढ़ नियंत्रण प्रोजेक्ट्स की जांच की भी मांग की।

सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी

पप्पू यादव ने कहा कि उनके पास इस मामले में कथित तौर पर शामिल लोगों की सूची है और वे इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट ले जाना चाहते हैं। उन्होंने पिछले कुछ दशकों में बाढ़ और सिंचाई से जुड़े प्रोजेक्ट्स में अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (SE) और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से लेकर SDO और सचिवों तक, सभी स्तरों पर जांच की मांग की और कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

पीएम क्यों नहीं दे रहे दखल : पप्पू यादव

पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में बाढ़ की स्थिति में वैसे दखल क्यों नहीं दिया, जैसा वे दूसरे राज्यों के मामले में करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के पास चुनाव लड़ने के लिए तो करोड़ों रुपये होते हैं, लेकिन गरीबों की मदद के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं होते। उन्होंने कहा कि जब भी देश में कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आई है, वे हमेशा प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों की मदद करते रहे हैं।

मुश्किल समय में लोगों के साथ एक बेटे की तरह खड़ा रहूंगा: पप्पू यादव

पप्पू यादव ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जब भी कोई आपदा आएगी, वे हमेशा प्रभावित लोगों के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे बाढ़ पीड़ितों को अकेला नहीं छोड़ेंगे और राहत कार्यों में मदद करते रहेंगे। उन्होंने दूर-दराज के बाढ़ प्रभावित इलाकों में नावों की कमी का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कई गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए पर्याप्त नावें उपलब्ध नहीं थीं।

स्थाई समाधान निकालने की मांग

पप्पू यादव ने फरक्का संधि, गंगा में गाद जमा होने, स्पर बनाने, तटबंधों को मजबूत करने और नदी प्रबंधन जैसे लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को उठाया। उन्होंने गंगा, कोसी, गंडक, सोन, महानंदा और कमला जैसी नदियों का ज़िक्र करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से अपील की कि वे बिहार की बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई दीर्घकालिक नीति बनाएं।

पप्पू यादव ने बाढ़ नियंत्रण और कटाव-रोधी उपायों के तहत पिछले 40 वर्षों में किए गए कामों की जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली परियोजनाओं की जांच से जिम्मेदार लोगों की भूमिका का पता चल सकता है। उन्होंने फिर कहा कि वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।