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क्या BJP में फिर लौट रहा ‘गुजरात मॉडल’? UP और गुजरात की नई नियुक्तियों ने बढ़ाई सियासी हलचल

BJP Gujarat UP Network: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। यूपी में विनोद तावड़े और जगदीश पटेल की नियुक्ति के जरिए चुनावी प्रबंधन को मजबूत करने की कोशिश दिख रही है। गुजरात और वाराणसी के अनुभव वाले नेताओं की तैनाती से मोदी-शाह के ‘गुजरात मॉडल’ की झलक भी नजर आ रही है।
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भारत

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Ashib Khan

Aug 19, 2026

Assembly Election 2027

आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी ने तैयारी की तेज (Photo-IANS)

Assembly Election 2027: अगले साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने तैयारी तेज कर दी है। पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति के एक दिन बाद नितिन नवीन ने तीन राज्यों के प्रभारियों का भी ऐलान कर दिया है। जगदीश पटेल की यूपी में नियुक्ति, विनोद तावड़े की जिम्मेदारी और गुजरात में तरुण चुग की तैनाती के बीच 2027 के विधानसभा चुनावों के साथ 2029 लोकसभा की तैयारी के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी और गुजरात के नेता जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी नियुक्त किया। वहीं, राज्य सभा सांसद तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है।

जगदीश पटेल: गुजरात से पीएम मोदी के वाराणसी अभियान तक

जगदीश पटेल के लिए उत्तर प्रदेश कोई नया राजनीतिक मैदान नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पटेल पीएम नरेंद्र मोदी के वाराणसी अभियान की कोर टीम का हिस्सा थे। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वह चुनाव की घोषणा से करीब छह महीने पहले ही वाराणसी में सक्रिय हो गए थे। 

यही वजह है कि अब उनका यूपी का सह-प्रभारी बनना महज एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं माना जा रहा। पटेल के पास गुजरात बीजेपी की कार्यशैली का अनुभव है और साथ ही प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में चुनावी प्रबंधन का प्रत्यक्ष अनुभव भी है।

गुजरात क्यों महत्वपूर्ण है?

बीजेपी लंबे समय से गुजरात के नेताओं और कार्यकर्ताओं को उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के चुनावों में तैनात करती रही है। बता दें कि यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में गुजरात बीजेपी के करीब 165 कार्यकर्ताओं की टीम उत्तर प्रदेश भेजी गई थी। इन कार्यकर्ताओं को विधानसभा क्षेत्रों से लेकर संगठनात्मक इकाइयों और बूथ स्तर तक की जिम्मेदारियां दी गई थीं।

सुनील ओझा से जगदीश पटेल तक

गुजरात और वाराणसी के बीच बीजेपी का संबंध काफी पुराना है। दिवंगत सुनील ओझा इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी रहे थे।

गुजरात के पूर्व बीजेपी विधायक ओझा लंबे समय तक वाराणसी और काशी क्षेत्र में पार्टी के संगठनात्मक काम से जुड़े रहे। 2022 में उनके पास काशी और गोरखपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी थी, जिसके तहत करीब 136 विधानसभा सीटें आती थीं।

2023 में ओझा के निधन के बाद वाराणसी में बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में उनकी जगह को लेकर स्वाभाविक रूप से चर्चा हुई। 2024 के लोकसभा चुनाव में जगदीश पटेल की सक्रियता ने इस संदर्भ में खास ध्यान खींचा।

अब पटेल को पूरे उत्तर प्रदेश का सह-प्रभारी बनाए जाने से गुजरात-वाराणसी-यूपी की यह कड़ी औपचारिक संगठनात्मक भूमिका में बदलती दिखाई दे रही है।

विनोद तावड़े का अनुभव भी अहम

जगदीश पटेल अकेले यूपी की कमान नहीं संभालेंगे। उनके साथ विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया गया है।

तावड़े बीजेपी के अनुभवी संगठनकर्ता और चुनाव प्रबंधक माने जाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों के दौरान तावड़े, तरुण चुग और सुनील बंसल को पार्टी के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में गिना गया था।

इन नेताओं की भूमिका ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने, जहां संगठन को अतिरिक्त मजबूती की जरूरत थी, राज्य इकाइयों के साथ तालमेल बनाने और चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाने में रही थी।

अब तावड़े को उत्तर प्रदेश जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना बताता है कि पार्टी यूपी में सिर्फ राजनीतिक संदेश पर नहीं, बल्कि संगठनात्मक और चुनावी प्रबंधन पर भी जोर देना चाहती है।

बिहार चुनाव में तावड़े की भूमिका के बाद उन्हें यूपी की जिम्मेदारी मिलना पार्टी नेतृत्व के उनके संगठनात्मक अनुभव पर भरोसे का संकेत भी माना जा सकता है।

क्या लौट रहा है ‘गुजरात मॉडल’?

दरअसल, नरेंद्र मोदी और अमति शाह के दौर में बीजेपी ने चुनावी राजनीति को काफी हद तक पेशेवर और सूक्ष्म संगठनात्मक प्रबंधन में बदला। बूथ स्तर की तैयारी, डेटा आधारित रणनीति, केंद्रीय समन्वय, विधानसभा क्षेत्र की माइक्रो मैनेजमेंट और अनुभवी नेताओं की अलग-अलग राज्यों में तैनाती इसका हिस्सा रही।

गुजरात इस मॉडल की प्रयोगशाला रहा। अब माना जा रहा है कि नितिन नवीन भी मोदी-शाह के फॉर्मूले पर चल रहे हैं। क्योंकि जगदीश पटेल के पास गुजरात और वाराणसी का अनुभव है। विनोद तावड़े के पास राष्ट्रीय स्तर का चुनावी प्रबंधन अनुभव है। तरुण चुग अलग-अलग राज्यों में संगठन को मजबूत करने का अनुभव रखते हैं।

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