
चीतल हेलीकॉप्टर (फोटो- विकिपिडिया)
Cheetal helicopter: लद्दाख में कुछ समय पहले भारतीय सेना का चीतल हेलिकॉप्टर गश्ती के दौरान क्रैश हो गया। क्रैश की वजह संभावित तकनीकी खराबी बताई जा रही है। इस मामले की जांच भी जारी है, लेकिन इन सबके बावजूद भारतीय सेना के चीतल हेलीकॉप्टर लगातार लद्दाख व सियाचीन के दुर्गम पहाड़ों में उड़ान भर रहे हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा कि 20 मई को लेह के तंगत्से इलाके के पास क्रैश हुए सिंगल इंजन वाले हेलीकॉप्टर के ट्रांसमिशन सिस्टम में कोई मैटेरियल फेलियर नहीं थी। उन्होंने कहा कि जांच से पता चल पाएगा कि ट्रांसमिशन सिस्टम का कौन सा हिस्सा खराब हुआ था। इसके बाद सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि लेह स्थित हेडक्वाटर 14 कॉर्प्स करीब 25 चीतल हेलीकॉप्टर ऑपरेट करता है। भारतीय सेना का चीतल हेलीकॉप्टर, चीता हेलीकॉप्टर का री-इंजन वाला वर्जन है।
सेना के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारी एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव का इस्तेमाल लद्दाख व सियाचीन की पहाड़ियों में फ्रंट लाइन ड्यूटी के लिए नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि चीतल हेलीकॉप्टर का पावर-टू-वेट रेश्यो बहुत अच्छा है। 20 मई को क्रैश में दो पायलट, एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर सहित 3 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल सचिन मेहता बच गए थे।
सैन्य अधिकारी ने कहा कि आधुनिक और कम ईंधन खपत वाले TM333–2M2 इंजन से लैस चीतल में ऑटोमैटिक बैक-अप इंजन कंट्रोल सिस्टम होता है। चीतल प्रोजेक्ट लगभग 25 साल पहले शुरू किया गया था ताकि ज्यादा ऊंचाई पर ऑपरेशन की क्षमता बढ़ाई जा सके, मेंटेनेंस आसान हो सके और सुरक्षित व भरोसेमंद ऑपरेशन के लिए मिड-लाइफ अपग्रेड मिल सके।
20 मई के क्रैश ने पुराने हो रहे चीता और चेतक बेड़े को जल्द बदलने की जरूरत को फिर से उजागर किया है। ये हेलीकॉप्टर छह दशक पहले डिजाइन किए गए थे। कई क्रैश की घटनाओं के कारण इन हेलीकॉप्टरों के सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच-पड़ताल हो रही है। सेना अपनी क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए अभियान के तहत एक दो सालों में इन बेड़ों को हटाना शुरू कर देगी। साथ ही, आने वाले 8 से 10 सालों में इनकी जगह नए लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर लाएगी।
Updated on:
26 Jun 2026 11:49 am
Published on:
26 Jun 2026 11:49 am
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