
कांग्रेस (Photo - ANI)
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस (Congress) ने बीजेपी (BJP) के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के राजनीतिक नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। पार्टी अब सीधे उसी राजनीतिक भाषा में जवाब देने के बजाय सामाजिक सम्मान, हिस्सेदारी और अधिकार को अपने नए विमर्श का आधार बनाने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में जाति को हिस्सेदारी, दलितों को सम्मान, महिलाओं को स्वतंत्रता, युवाओं को अवसर और आदिवासी-अल्पसंख्यकों को अधिकार देने जैसे मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में लाया जा रहा है। इसे कांग्रेस के आक्रामक राजनीतिक नैरेटिव के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसमें सामाजिक न्याय के मुद्दों को चुनावी रणनीति से जोड़कर व्यापक राजनीतिक समर्थन तैयार करने की कोशिश है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस इस नई रणनीति को लगातार धार देने में जुटी है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘सम्मान की राजनीति’ कांग्रेस को 'हिंदू ध्रुवीकरण' के मुकाबले एक नया और प्रभावी सियासी विकल्प दे सकती है?
2014 के बाद राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी लगातार एजेंडा तय करती रही। हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और धार्मिक पहचान जैसे मुद्दों पर कांग्रेस अक्सर प्रतिक्रिया देने की स्थिति में रही। 2024 के बाद कांग्रेस के रणनीतिकारों ने इसे बदलने की कोशिश की है। जातीय जनगणना और आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी का सवाल उठाकर पार्टी ने बहस का केंद्र बदलने की कोशिश की। अब इस राजनीति का अगला चरण सम्मान के सवाल से जुड़ता दिखाई दे रहा है। पिछले दिनों में कांग्रेस ने छात्र आंदोलन के तहत शिक्षा और बेरोजगारी, महिला सम्मान और बराबरी, दलितों के साथ भेदभाव के मुद्दे उठाए हैं। आने वाले दिनों में आदिवासी और अल्पसंख्यक सम्मेलन होते दिख सकते हैं।
सप्ताह के मुद्दों में हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित शुद्धीकरण विवाद को दलित सम्मान और छुआछूत के बड़े सवाल से जोड़ा गया। पुणे में महिलाओं के अधिकारों और आज़ादी की बात कर शहरी, शिक्षित और युवा महिला मतदाताओं को साधने को कोशिश की। कांग्रेस का एजेंडा दलित का सम्मान करना है और साथ ही ओबीसी को हिस्सेदारी दिलाना भी है। इसके साथ ही महिला को स्वतंत्रता, युवा को अवसर, आदिवासी को अधिकार अल्पसंख्यक को बराबरी और सुरक्षा का अधिकार देने आदि जैसे सप्ताह के मुद्दों में शामिल थे।
Updated on:
01 Sept 2026 01:47 am
Published on:
01 Sept 2026 01:46 am
