
राजनीति में Gen-Z पर वंशवाद भारी है (Photo-AI)
Gen Z Politics India: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए Gen Z प्रोटेस्ट ने चेन रिएक्शन का काम किया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में युवा सड़कों पर उतर रहे हैं और अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। युवाओं के इस रूप ने राजनीतिक दलों को अपनी सोच-समझ और रणनीति में बदलाव करने के लिए मजबूर कर दिया है। पार्टियां युवाओं को साधने के लिए हर जतन कर रही हैं।
‘हैलो फ़्रेंड्स’ के साथ पीएम नरेंद्र मोदी के इंस्टा वीडियो का शुरू होना, इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। हालांकि, जब बात युवाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की आती है, तो लगभग सभी राजनीतिक दल सहज नजर नहीं आते और अगर वह थोड़ी बहुत सहजता दिखाते भी हैं, तो अधिकतर उन युवाओं के प्रति जो राजनीतिक परिवारों से आते हैं – यानी वंशवाद को बढ़ावा।
जेन-जी यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मे या 14 से 29 वर्ष की आयु वाले नेताओं की संख्या संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महज 26 है। इनमें से आधे राजनीतिक परिवारों से आते हैं। इस आयु वर्ग के छह लोकसभा सांसदों में से पांच और 20 विधायकों में से आठ का राजनीतिक परिवारों से रिश्ता है।
वैसे, अपने देश में चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 वर्ष है। इसका मतलब है कि Gen Z आबादी का एक बड़ा हिस्सा चुनाव नहीं लड़ सकता। लेकिन 40 वर्ष या उससे कम उम्र के नेताओं में भी वंशवाद हावी है। इसे हम जेन D (Dynasty) भी कह सकते हैं यानी वंशवादी पीढ़ी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि इस उम्र के 37.8% नेता राजनीतिक परिवारों से आते हैं।
पार्टी के हिसाब से देखें तो भाजपा के 240 लोकसभा सांसदों में से नौ 40 वर्ष से कम उम्र के हैं और इनमें से पांच राजनीतिक परिवारों से आते हैं। वहीं, कांग्रेस के 98 सांसदों में से सात 40 वर्ष से कम उम्र के हैं और उनमें से चार राजनीतिक परिवारों से जुड़े हैं। इसी तरह, समाजवादी पार्टी के 37 लोकसभा सांसदों में से सात इस आयु वर्ग के हैं और उनमें से छह का परिवार राजनीति में सक्रिय रहा है। भाजपा की सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (TDP ) के 16 सांसदों में से चार की उम्र 40 वर्ष से कम है और ये चारों राजनीतिक परिवारों से जुड़े हुए हैं।
लोकसभा सांसद (40 वर्ष से कम उम्र)
| राजनीतिक दल | कुल सांसद | 40 से कम उम्र के सांसद | राजनीतिक परिवार से जुड़े सांसद |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 240 | 9 | 5 |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | 98 | 7 | 4 |
| समाजवादी पार्टी (SP) | 37 | 7 | 6 |
| तेलुगु देशम पार्टी (TDP) | 16 | 4 | 4 |
भाजपा सहयोगियों के साथ या अपने दम 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सत्ता में है। उसके कुल 1,811 विधायक हैं। इनमें से 121 विधायक 40 वर्ष या उससे कम उम्र के हैं और इनमें 41 राजनीतिक परिवारों से आते हैं। कांग्रेस, जिसका राजनीतिक प्रभाव हाल के वर्षों में कम हुआ है और जो अब केवल चार राज्यों में अपने दम पर तथा एक अन्य राज्य में गठबंधन के जरिए सत्ता में है, उसके कुल 662 विधायक हैं। इनमें से 52 की उम्र 40 वर्ष या उससे कम है और 23 राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। रिपोर्ट बताती है कि 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए सांसद या विधायक बनने संभावना उस स्थिति में बढ़ जाती है, यदि उनका कोई अपना पहले से ही राजनीति में हो।
राज्यों में हाल
| राजनीतिक दल | कुल राज्य/UT (सत्ता/गठबंधन) | कुल विधायक | 40 से कम उम्र के विधायक | राजनीतिक परिवार से जुड़े विधायक |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 22 | 1,811 | 121 | 41 |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | 5 (4 स्व-बल + 1 गठबंधन) | 662 | 52 | 23 |
उदाहरण के तौर पर अभिषेक बनर्जी (38) तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं। यदुवीर वाडियार (34) भाजपा सांसद, मैसूर के पूर्व शाही परिवार से संबंध रखते हैं और पूर्व सांसद श्रीकांतदत्त नरसिंहराजा वाडियार के दत्तक पुत्र हैं। रक्षा खडसे (39) महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे की पुत्रवधू हैं। करण भूषण सिंह (35) भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र हैं।
इसी तरह कांग्रेस की प्रियंका जरकीहोली (29) कर्नाटक के मंत्री सतीश जरकीहोली की बेटी और प्रमुख जरकीहोली राजनीतिक परिवार की सदस्य हैं। राष्ट्रीय लोक दल के चंदन चौहान (37) उत्तर प्रदेश के पहले उपमुख्यमंत्री नारायण सिंह के पोते हैं। समाजवादी पार्टी के आदित्य यादव (38) और अक्षय यादव (39) उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के भतीजे और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के चचेरे भाई हैं। शिवसेना के श्रीकांत शिंदे , महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे हैं। तेलुगु देशम पार्टी के जी.एम. हरीश बालयोगी (35) लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी के बेटे हैं। वहीं, भारत मथुकुमिल्ली (37) पूर्व सांसदों के पोते और आंध्र प्रदेश के प्रमुख नंदमुरी-नारा फिल्म एवं राजनीतिक परिवार के दामाद हैं।
देश की 31 विधानसभाओं में कुल 344 विधायक 40 वर्ष या उससे कम उम्र के हैं। इनमें से 121 यानी 35.2% विधायक राजनीतिक परिवारों से आते हैं। इस आयु वर्ग में राजनीतिक परिवारों से आने वाले विधायकों का सबसे ज्यादा अनुपात ओडिशा में है, जहां 16 में से 14 विधायकों के सीधे राजनीतिक संबंध हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 16 में से 12, उत्तर प्रदेश में 32 में से 23 और कर्नाटक एवं हरियाणा में नौ में से पांच-पांच विधायक राजनीतिक परिवारों से आते हैं। तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य, जहां इस साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव हुए, इस मामले में अपवाद हैं। इन राज्यों में 40 वर्ष या उससे कम उम्र के विधायकों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन राजनीतिक परिवारों से आने वाले युवा विधायकों की संख्या बहुत कम।
उदाहरण के लिए, तमिलनाडु के इस आयु वर्ग के 47 विधायकों में केवल तीन राजनीतिक परिवारों से आते हैं। पश्चिम बंगाल के 40 वर्ष या उससे कम उम्र के 45 विधायकों में सिर्फ पांच राजनीतिक परिवारों से जुड़े हैं। केरल में ऐसे 16 विधायकों में केवल एक विधायक राजनीतिक परिवार से आता है। इसी तरह, पंजाब में 40 वर्ष या उससे कम उम्र के 12 विधायकों में केवल एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है। विधानसभा की कुल संख्या में हिस्सेदारी के लिहाज से तमिलनाडु में 40 वर्ष या उससे कम उम्र के विधायकों का अनुपात सबसे अधिक 20.1 प्रतिशत है। इसके बाद मेघालय 18.3 %, पश्चिम बंगाल 15.3%, बिहार 13.2% और केरल 11.4% के साथ आते हैं। 16 राज्यों में, 40 वर्ष या उससे कम उम्र के विधायक विधानसभा की कुल संख्या के 10% से भी कम हैं।
वंशवाद को आगे बढ़ा रहे प्रमुख विधायकों में तेजस्वी यादव, आदित्य सुरजेवाला, अर्जुन चौटाला, विक्रमादित्य सिंह, देवयानी राणा, जयवर्धन सिंह, अभिजीत शाह, श्रीजया चव्हाण, आदित्य ठाकरे, रोहित पाटील, सूर्यकुमार ओकराम, सागर चरण दास, प्रतीक भूषण सिंह, तेज प्रताप सिंह, सूर्यकुमार ओकराम, सर्वन निषाद और अब्बास अंसारी शामिल हैं। आदित्य सुरजेवाला की उम्र 27 साल है और वह हरियाणा के एकमात्र जेन-जी विधायक हैं।
Updated on:
27 Aug 2026 03:52 pm
Published on:
27 Aug 2026 02:59 pm
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