
दिल्ली पुलिस के एसआई की बेटी और एसीपी की पत्नी मीडिया से बात करते हुए। (Photo ANI)
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के परिवारों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि इस प्रदर्शन की आड़ में अराजक तत्वों ने हिंसा फैलाई, जिसकी वजह से ड्यूटी पर तैनात कई जवान घायल हो गए। घायल एसीपी की पत्नी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि 20 जुलाई की देर रात जब मेरे पति गंभीर रूप से घायल अवस्था में घर लौटे, तो वह पल मेरे और हमारी दो साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक था। आज मैं दिल्ली पुलिस के अन्य जवानों के परिवारों के साथ यहां आई हूं, ताकि हम अपनी आपबीती लोगों के सामने रख सकें।
घायल सब-इंस्पेक्टर (एसआई) की बेटी ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके पिता भारतीय नौसेना में 15 साल तक मरीन कमांडो के रूप में देश की सेवा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि पापा जंतर-मंतर पर पहली पंक्ति की बैरिकेडिंग पर तैनात थे। वह घर आकर अक्सर बताते थे कि अब यह प्रदर्शन छात्रों का नहीं रहा, बल्कि इसमें अराजक तत्व हावी हो चुके हैं। 25 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे उपद्रवियों की भीड़ ने उन्हें जबरन घसीटा और उनके साथ मारपीट की गई। वह करीब चार घंटे तक राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बेहोश रहे। रात 10 बजे जब उनके साथी उन्हें घर लेकर लाए, तो उनकी वर्दी पूरी तरह खून से सनी हुई थी।
वे अपने अपराधों को छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे थे और मेरे पिता व सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज करा रहे थे। मुझे बहुत दुख हुआ और मैंने तय किया कि मुझे भी अपने पिता के लिए न्याय मांगना चाहिए। मुझे पुलिस के अन्य परिवारों का समर्थन मिला, और हम सुप्रीम कोर्ट गए। हमने एक वकील से माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने हमारा पक्ष रखने का अनुरोध किया। वकील ने हमें भरोसा दिलाया कि इस देश के नागरिक के तौर पर हमारे भी समान अधिकार हैं और हमें भी न्याय मिलेगा।
एसआई की बेटी ने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर उनके पिता को अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है, जबकि हमलावर खुद को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। मुझे बहुत दुख हुआ और मैंने तय किया कि मुझे भी अपने पिता के लिए न्याय मांगना चाहिए। मुझे पुलिस के अन्य परिवारों का समर्थन मिला और सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला लिया। परिजनों का कहना है कि देश के नागरिक होने के नाते उन्हें भी बराबरी का अधिकार और न्याय मिलना चाहिए।
एक अन्य घायल पुलिस अधिकारी के परिवार का कहना है कि यह छात्रों का विरोध-प्रदर्शन नहीं था, जबकि इसमें कुछ शरारती तत्व शामिल थे। जिन्होंने छात्रों के विरोध को खराब करने और उसे बदनाम करने और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की। परिजनों ने मांग की है कि वास्तविक छात्रों का रिकॉर्ड देखकर उन्हें छोड़ दिया जाए, लेकिन पुलिस पर हाथ उठाने वाले और हिंसा भड़काने वाले उपद्रवियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
Updated on:
31 Jul 2026 12:33 pm
Published on:
31 Jul 2026 12:21 pm
