
Delhi Protest : SIR विवाद पर भाजपा का पलटवार, मतदाता सूची सुधार और विपक्ष को जवाब देने की तैयारी (फोटो सोर्स: ANI)
Delhi Protest Modi Government Strategy: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज है। विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच भाजपा और केंद्र सरकार ने मोर्चा संभालते हुए प्रशासनिक व्यवस्था, राजनीतिक जवाब और युवाओं से संवाद पर एक साथ काम करना शुरू कर दिया है। एक तरफ चुनाव आयोग छूटे हुए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया तेज कर रहा है, तो दूसरी ओर राजधानी में प्रदर्शन स्थलों को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी INDIA गठबंधन और अन्य विरोधी समूहों के प्रदर्शन के बीच भाजपा ने अपनी रणनीति के कई मोर्चे सक्रिय किए हैं। पार्टी चुनाव आयोग के फैसलों पर उठ रहे सवालों का जवाब तथ्यों के जरिए देने की तैयारी में है। साथ ही, विपक्ष पर राजनीतिक हमला तेज करते हुए सरकार कानून-व्यवस्था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन बनाने का दावा कर रही है।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के अनुसार, वर्ष 2026 की SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली मसौदा सूची में करीब 47.7 लाख नाम हटाए गए। इनमें से लगभग 33 लाख प्रविष्टियां तार्किक विसंगतियों या मतदाता रिकॉर्ड के मानचित्रण से जुड़ी समस्याओं के दायरे में थीं। अधिकारी के मुताबिक, इनमें से करीब 20 लाख मामलों का समाधान किया जा चुका है।
दिल्ली में 14,947 बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO), 902 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO), 70 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) और 13 जिला निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से शिकायतों के समाधान की व्यवस्था की गई है।
इस बीच, चुनाव आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उद्देश्य ऐसे पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना है, जिनके नाम किसी कारण से छूट गए। पश्चिम बंगाल और बिहार में भी इसी तरह की पहल की जानकारी दी गई है। बिहार में 90 हजार से अधिक विशेष शिविर आयोजित करने की योजना का उल्लेख किया गया है।
राजधानी में लगातार प्रदर्शनों और यातायात संबंधी परेशानियों के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का आदेश जारी किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन समिति की सिफारिश पर अब रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का CBD मैदान नए निर्धारित स्थल होंगे।
प्रशासन का तर्क है कि इससे आम नागरिकों को होने वाली असुविधा कम होगी और संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना आसान होगा। हालांकि, इस बदलाव को लेकर प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और सार्वजनिक स्थानों तक उनकी पहुंच पर बहस भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम, निर्वाचन आयुक्तों के बीच कथित असहमति और मतदाता सूची में हुए बदलावों का तथ्यपत्र तैयार कर रही है। इसके साथ ही भाजपा कांग्रेस, राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी को निशाने पर रखकर विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब देने की तैयारी में है।
पार्टी नेतृत्व का तर्क है कि प्रदर्शन और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग सहित सभी प्रक्रियाएं कानून के दायरे में होनी चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए संसद में महाभियोग जैसी निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
युवाओं से बातचीत का रास्ता भी सरकार के विकल्पों में शामिल बताया गया है। इससे पहले NEET प्रश्नपत्र लीक विवाद पर हुए आंदोलन के दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने प्रदर्शनकारी समूहों से बातचीत की थी। बाद में केंद्र ने सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों पर रोक लगाने वाला कानून पारित किया और परीक्षा सुधारों के लिए कदम उठाए।
SIR विवाद का समाधान केवल प्रशासनिक आंकड़ों से नहीं होगा। मतदाताओं को यह भरोसा दिलाना भी जरूरी है कि पात्र नागरिकों का नाम सूची से बाहर नहीं रहेगा और शिकायतों का निपटारा निष्पक्ष तरीके से होगा। दूसरी ओर, प्रदर्शन स्थलों में बदलाव तभी प्रभावी साबित होगा, जब विरोध करने वालों को अपनी बात रखने का वास्तविक अवसर मिले।
फिलहाल भाजपा और केंद्र सरकार के सामने दोहरी चुनौती है विपक्ष के हमलों का जवाब देना और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों को दूर करना। आने वाले दिनों में मतदाता सूची में सुधार की गति और सरकारी संवाद की प्रभावशीलता ही इस राजनीतिक टकराव की दिशा तय कर सकती है।
Updated on:
13 Oct 2026 07:54 am
Published on:
13 Oct 2026 07:11 am
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