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Delhi SIR: 60% वोटर नोटिस का निपटारा, 12 दिनों में सुलझे 16 लाख मामले, 4 दिसंबर को आएगी फाइनल लिस्ट

Delhi Voter List: दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत जारी किए गए 33 लाख से ज्यादा नोटिसों में से लगभग 20 लाख मामलों का निपटारा कर दिया गया है। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, अंतिम वोटर लिस्ट 4 दिसंबर को जारी की जाएगी।
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SIR Delhi

दिल्ली में 60 प्रतिशत वोटर नोटिस का निपटारा (फोटो- IANS)

Delhi SIR: दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत जारी नोटिसों को निपटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय के अनुसार, वोटर लिस्ट में बने रहने के लिए पात्रता का सबूत मांगने वाले कुल 33 लाख नोटिसों में से 20 लाख से ज्यादा नोटिसों का निपटारा कर दिया गया है। यह कुल मामलों का 60 प्रतिशत से ज्यादा है। अंतिम वोटर लिस्ट 4 दिसंबर को जारी की जानी है, इसके लिए तय समयसीमा में 50 दिन से ज्यादा का समय बचा है। अंतिम लिस्ट जारी करने की तारीख में चौथी बार 26 सितंबर को बदलाव किया गया था।

12 दिनों में निपटाए गए करीब 16 लाख नोटिस

ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को प्रकाशित होने के बाद शुरुआती 30 दिनों में नोटिसों के निपटारे की रफ्तार बेहद धीमी थी और 29 सितंबर तक महज 4 लाख मामलों का ही समाधान हो सका था। लेकिन इसके बाद के इस प्रक्रिया ने 12 दिनों में जबरदस्त तेजी पकड़ी और लगभग 16 लाख नोटिसों का निपटारा किया गया, यानि हर दिन औसतन 1.33 लाख नोटिस।

सोमवार तक निपटाए गए कुल 20 लाख मामलों में वे मतदाता शामिल हैं जिनकी पात्रता सत्यापित हो चुकी है और जिनका नाम अंतिम सूची में बना रहेगा, साथ ही वे मामले भी शामिल हैं जिन्हें अयोग्य पाए जाने पर खारिज किया गया है। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार आपत्तियों और नोटिसों के निपटारे का यह कार्य 30 नवंबर तक जारी रह सकता है।

दिल्ली में 47.5 लाख वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर

SIR शुरू होने से पहले दिल्ली में लगभग 1.45 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 97.5 लाख मतदाताओं के नाम शामिल किए गए थे। अनुपस्थित पाए जाने, दूसरी जगह चले जाने, मृत्यु या डुप्लीकेट एंट्री जैसी वजहों से करीब 47.5 लाख मतदाताओं को 'अनकलेक्टिबल’ श्रेणी में रखा गया और उनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल 97.5 लाख मतदाताओं में से लगभग 33.1 लाख को नोटिस जारी किए गए थे। उनसे कहा गया था कि वे फाइनल वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखने के लिए अपनी पात्रता साबित करने वाले दस्तावेज जमा करें। इनमें से लगभग 13.79 लाख वोटर 2002 की SIR वोटर लिस्ट से अपना संबंध साबित नहीं कर पाए, जबकि लगभग 19.33 लाख वोटरों के डेटा कलेक्शन फ़ॉर्म में गड़बड़ियां पाई गईं।

नोटिसों के निपटारे की प्रक्रिया हुई आसान

पहले जिन वोटरों को नोटिस मिलते थे, उन्हें तय तारीख पर लोकल इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के ऑफिस जाकर 13 खास दस्तावेज़ों में से कोई एक दिखाना होता था। लेकिन 26 सितंबर को हुई एक मीटिंग के बाद चुनाव आयोग ने सुनवाई की प्रक्रिया में बदलाव किया। आयोग के अनुसार, जिन वोटरों को लॉजिकल गड़बड़ियों या पिछली लिस्ट से लिंक न होने के कारण नोटिस मिले थे, उन्हें अब अपनी पात्रता साबित करने के लिए लोकल ऑफिस में खुद हाजिर होने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जरूरी दस्तावेज लेने के लिए वोटरों के घर जा सकते हैं।

इसके अलावा ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा भी बढ़ाई गई और परिवार के सदस्यों को उस वोटर की तरफ से पेश होने की इजाजत दी गई जिसे नोटिस मिला था। इसके साथ ही 30 सितंबर से ERO को बिना औपचारिक सुनवाई के BLO की रिपोर्ट के आधार पर नोटिस से जुड़े मामलों को सुलझाने का अधिकार दिया गया।

अधिकारियों की संख्या और विशेष शिविर बढ़ाए गए

24 सितंबर को असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) की संख्या 297 से बढ़ाकर 902 कर दी गई। इन अधिकारियों को भी नोटिस से जुड़े मामलों को सुलझाने की प्रक्रिया संभालने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, 20 सितंबर से दिल्ली में हर वीकेंड स्पेशल कैंप लगाए जा रहे हैं। इन कैंपों में बेघर लोगों, तोड़-फोड़ की कार्रवाई के कारण विस्थापित हुए लोगों, ट्रांसजेंडर समुदाय और सेक्स वर्कर जैसे समूहों तक पहुंचने पर ध्यान दिया जा रहा है।

वोटर जागरूकता बढ़ाने के लिए होर्डिंग, रेडियो जिंगल, विज्ञापन और दिल्ली मेट्रो में अनाउंसमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को रोज कम से कम 10 सुनवाई करने का टारगेट दिया गया है।

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