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Delhi Building Collapse:’किसका है मकान, किसी को नहीं पता’: 32 हजार रुपए किराया देकर भी टूटी दीवारों के बीच रह रहे थे छात्र

Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने के बाद छात्रों की सुरक्षा और मकान मालिकों की जवाबदेही पर सवाल उठे हैं। कई छात्रों का कहना है कि हजारों रुपए किराया देने के बावजूद उन्हें मकान के असली मालिक की जानकारी नहीं होती और किसी समस्या की स्थिति में वे ब्रोकर पर निर्भर रहते हैं।
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भारत

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kamlesh sharma

Sep 08, 2026

Delhi Building Collapse

Delhi Building Collapse (Photo-IANS)

Delhi Building Collapse: नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला पीजी इमारत के ढहने से सात छात्रों की मौत के बाद इलाके में छात्रावास और पीजी में रहने वाले युवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ी चिंता यह भी सामने आई है कि यहां हजारों रुपए किराया देने वाले कई छात्रों को यह तक पता नहीं होता कि जिस मकान में वे रह रहे हैं, उसका असली मालिक कौन है और किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी।

सत्य निकेतन में पीजी लेने वाले छात्रों के मुताबिक, मकान मालिकों से सीधे संपर्क के बजाय उनकी पूरी बातचीत ब्रोकर या बिचौलियों के जरिए होती है। यही बिचौलिए कमरे दिलाने से लेकर पानी और दूसरी समस्याओं को सुलझाने तक छात्रों के लिए संपर्क का एकमात्र जरिया बने हुए हैं। ऐसे में महंगा किराया देने के बावजूद छात्रों को खराब रखरखाव, पानी की कमी और जर्जर इमारतों जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

'दीवारें टूटी थीं, लेकिन हमें मालिक का पता नहीं था'

यशवंत वेमानंद रेड्डी रेड्डम ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि वह वर्ष 2024 में सत्य निकेतन की उसी इमारत में रह रहे थे, जो अब ढह चुकी है। बाद में मरम्मत का काम शुरू होने की वजह से उन्होंने मकान खाली कर दिया था। उन्होंने बताया कि इमारत की केवल ऊपरी मंजिल अपेक्षाकृत बेहतर हालत में थी, जबकि बाकी तीन मंजिलें काफी पुरानी थीं। इन कमरों की हालत इतनी खराब थी कि वहां रहना मुश्किल था। दीवारें टूटी हुई थीं और संकरी सीढ़ियों का भी ठीक से रखरखाव नहीं किया जाता था। रेड्डी के मुताबिक, सबसे बड़ी बात यह थी कि उन्हें इमारत के मालिक के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वे केवल उन बिचौलियों को जानते थे, जिनके जरिए उन्हें कमरा मिला था।

'पेंट इतना अच्छा था कि खराब हालत का अंदाजा नहीं लगा'

इमारत में रहने वाले एक अन्य छात्र हबीब हादसे के वक्त वहां मौजूद नहीं थे, इसलिए उनकी जान बच गई। उन्होंने बताया कि इमारत को बाहर से इतना अच्छी तरह पेंट किया गया था कि उसकी वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल था। हबीब ने बताया कि एक बेड का किराया करीब 16 हजार रुपए था। दो बेड के लिए उन्हें कुल 32 हजार रुपए देने पड़ते थे। इसके बावजूद उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि मकान का मालिक कौन है। उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए एक थर्ड पार्टी या बिचौलिया ही संपर्क में रहता था।

सत्य निकेतन में कई छात्रों को नहीं पता मकान मालिक कौन

सत्य निकेतन में रहने वाली छात्रा निराली ने बताया कि इलाके में यह समस्या आम है। उनके मुताबिक, ज्यादातर मकान मालिक वहां नहीं रहते और कई बार किरायेदारों के पास मालिक का मोबाइल नंबर तक नहीं होता।

उन्होंने कहा कि फिलहाल जिस फ्लैट में वह रह रही हैं, उसके मालिक का नंबर भी उनके पास नहीं है। उनके पास केवल ब्रोकर का नंबर है और किसी तरह की समस्या होने पर उन्हें उसी से संपर्क करना पड़ता है।

निराली के मुताबिक, सत्य निकेतन में रहने वाले अधिकांश लोग अपने मकान मालिक के बजाय ब्रोकर को ही जानते हैं। उन्होंने बताया कि पीजी में एक बेड का किराया औसतन करीब 15 हजार रुपए तक है और इलाके के महंगे पीजी में यह राशि और भी ज्यादा हो सकती है।

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