10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भारत बनाएगा अपना फाइटर जेट इंजन, DRDO का कावेरी 2.0 इंजन अब तेजस को देगा स्वदेशी ताकत

DRDO Kaveri Engine 2.0: अमेरिका से तेजस फाइटर जेट के इंजन मिलने में देरी हो रही है। अब DRDO ने नया 'कावेरी 2.0' स्वदेशी इंजन तैयार करना शुरू कर दिया है, जिससे भारत की विदेशी इंजनों पर निर्भरता खत्म होगी।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Pratiksha Gupta

Aug 10, 2026

E F404 engine alternative, GTRE Kaveri 2.0 news, Indian indigenous jet engine

डीआरडीओ का नया कावेरी इंजन 2.0 / फोटो सोर्स- X(@Varun55484761

Tejas Fighter Jet: भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान तेजस Mk-1A के उत्पादन में अमेरिकी कंपनियों की तरफ से हो रही देरी अब भारत के लिए एक बड़ा अवसर बन गई है। अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) द्वारा F404 इंजनों की डिलीवरी में हो रही देरी के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक बड़ा कदम उठाया है। DRDO की प्रयोगशाला 'GTRE' ने अब भारत का अपना स्वदेशी 'कावेरी 2.0' जेट इंजन तेजी से बनाना शुरू कर दिया है।

क्या है कावेरी 2.0 की ताकत और परफॉर्मेंस?

1980 शुरू हुए मूल कावेरी प्रोजेक्ट को शुरुआती तकनीकी दिक्कतों और वजन संबंधी दिक्कतों की वजह से तेजस से अलग कर दिया गया था। हालांकि, GTRE ने अब इसके कोर डिजाइन को पूरी तरह नए सिरे से तैयार किया है। नया कावेरी 2.0 बिना आफ्टरबर्नर के 55 से 60 किलोन्यूटन का ड्राई थ्रस्ट और आफ्टरबर्नर के साथ 90 से 100 किलोन्यूटन का वेट थ्रस्ट देने में सक्षम होगा। यह क्षमता वर्तमान तेजस Mk-1A में इस्तेमाल हो रहे अमेरिकी GE F404 इंजनों के बिल्कुल बराबर है। इसके अलावा पुराने कोर (KDE) का वजन जो लगभग 1235 किलोग्राम था, उसे नए एडवांस्ड मैटेरियल और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की मदद से घटाकर 1100 किलोग्राम से भी कम कर दिया है। भविष्य में इसे 1000 किलोग्राम तक हल्का बनाने का लक्ष्य है, ताकि फाइटर जेट को और अधिक स्पीड मिल सकें।

आधुनिक तकनीकों से लैस होगा स्वदेशी इंजन

कावेरी 2.0 को आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरतों के हिसाब से बहुत ही एडवांस तकनीक से बनाया जा रहा है। इसमें टाइटेनियम अलॉय से बने सिंगल-पीस ब्लिस्क का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो हवा के रिसाव को रोकेंगे और इंजन के थ्रस्ट-टू-वेट रेशियो को काफी बेहतर करेंगे। अत्यधिक तापमान को सहन करने के लिए इसमें विशेष सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड्स लगाए जा रहे हैं, जिससे इंजन की थर्मल एफिशिएंसी बढ़ेगी। इसके साथ ही इंजन को डिजिटल रूप से संचालित करने के लिए फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल सिस्टम जोड़ा जाएगा। जिससे किसी भी मौसम या ऊंचाई पर विमान को उड़ाना आसान और सुरक्षित रहेगा।

तेजस और 'घातक' ड्रोन को कैसे मिलेगा फायदा?

अमेरिकी इंजनों की कमी से निपटने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास कई एयरफ्रेम तैयार हैं, लेकिन इंजनों के इंतजार में विमानों की डिलीवरी प्रभावित हो रही है। इस समस्या को हल करने के लिए कावेरी 2.0 को लागू किया जाएगा। सबसे पहले कावेरी का बिना आफ्टरबर्नर वाला 'ड्राई' वर्जन भारत के मानवरहित लड़ाकू ड्रोन 'घातक' को पावर देगा, जो कम ईंधन खपत और बेहतर स्टील्थ सुनिश्चित करेगा। इसके बाद 2030 के दशक में जब तेजस Mk-1A बेड़े के अमेरिकी इंजन अपने ओवरहालिंग चक्र में पहुंचेंगे, तब कावेरी 2.0 को मिड-लाइफ अपग्रेड के रूप में स्वदेशी विकल्प बनाकर इन विमानों में फिट किया जाएगा।

अमेरिका पर निर्भरता खत्म, साफ्रान डील से अलग है यह प्रोजेक्ट

कावेरी 2.0 प्रोजेक्ट पूरी तरह से भारत का अपना प्रयास है। यह फ्रांस की कंपनी साफ्रान के साथ चल रहे 120 kN वाले इंजन प्रोजेक्ट से अलग है। साफ्रान के साथ भारत 120 kN थ्रस्ट वाला भारी इंजन 5th जनरेशन स्टील्थ फाइटर 'AMCA' के लिए तैयार कर रहा है। जबकि कावेरी 2.0 एक मीडियम-थ्रस्ट वर्कहॉर्स इंजन है, जो तेजस जैसे 4.5 जनरेशन लड़ाकू विमानों के लिए पूरी तरह फिट बैठता है। GTRE अब इसके परीक्षण की तैयारी में जुट गया है, जिसके लिए एक संशोधित तेजस विमान का उपयोग किया जाएगा। अगर यह टेस्ट सफल रहता है, तो भारत को इंजनों के लिए किसी दूसरे देश के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा और भारत दूसरे देशों को भी अपने इंजन बेच सकेगा।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग