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One Nation One Election: ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ पर सरकार की तैयारी पूरी, अर्जुन राम मेघवाल इस दिन संसद में करेंगे पेश

One Nation One Election: एक देश-एक चुनाव विधेयक को सोमवार को केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संसद में पेश करेंगे। सरकार की प्लानिंग है कि 2034 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएं।

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arjun ram meghwal

arjun ram meghwal

One Nation One Election: मोदी कैबिनेट ने हाल ही में वन नेशन-वन इलेक्शन यानि एक देश-एक चुनाव (One Nation One Election) के विधेयक को मंजूरी दी थी। मोदी सरकार ने अब इस विधेयक को संसद के पटल पर पेश करने का फैसला किया है, जिसके तहत सोमवार को केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल (Arjun Ram Meghwal) वन नेशन-वन इलेक्शन विधेयक को पेश करेंगे। वहीं सरकार की प्लानिंग है कि 2034 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएं।

अर्जुन राम मेघवाल करेंगे पेश

एएनआई के अनुसार केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल लोकसभा में पहला संशोधन विधेयक एक साथ चुनाव कराने को पेश करेंगे, जबकि दूसरी विधेयक दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए पेश करेंगे। बता दें कि सितंबर 2024 में केंद्र सरकार ने वन नेशन-वन इलेक्शन को लेकर बनी पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट को मंजूरी दी थी।

विपक्ष कर रहा विरोध

मोदी कैबिनेट से वन नेशन-वन इलेक्शन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद विपक्ष इसका विरोध कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्तापक्ष के नेता इसका समर्थन कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस पर कहा एक राष्ट्र-एक चुनाव राष्ट्रहित में है, इससे खर्च बचेगा और विकास होगा। मैं विपक्ष से खासकर कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि 1967 तक देश में एक राष्ट्र एक चुनाव होता रहा, उस समय संघीय ढांचे को चोट नहीं पहुंच रही थी? इससे देश मजबूत होगा, विकास होगा। एक राष्ट्र एक चुनाव राष्ट्रहित में है, अगर कांग्रेस इससे इनकार करती है तो मुझे लगता है कि यह दोगलापन है। वहीं JDU सांसद संजय झा ने एक राष्ट्र-एक चुनाव पर कहा हमारी पार्टी और हमारे नेता नीतीश कुमार पहले दिन से ही इसके पक्ष में हैं, लोग चाहते हैं कि एक बार चुनाव हो जाए तो उसके बाद 5 साल तक काम हों। बार-बार चुनाव कराने से बहुत खर्च भी होता है। हम इसका पूरा समर्थन करते हैं। शुरू से ही लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते रहे हैं। दिक्कत तब शुरू हुई जब कांग्रेस पार्टी ने राज्यों में राज्यपाल शासन लगाना शुरू किया। अगर एक साथ चुनाव होंगे तो देश की अर्थव्यवस्था और विकासात्मक कार्यों में सुविधा मिलेगी।

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