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कितनी जवान है भाजपा? अध्यक्ष नितिन नबीन हैं 45 साल के, मुख्यमंत्रियों और प्रदेशाध्यक्षों की क्या है उम्र

BJP President Nitin Naveen: बीजेपी प्रेसिडेंट नितिन नबीन की उम्र 45 साल है। भाजपा लगातार युवा चेहरों में निवेश कर रही है। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उम्र भी 55 साल से कम है। पढ़ें पूरी खबर...

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नितिन नबीन बने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (Photo-IANS)

BJP President Nitin Naveen: नितिन नबीन 20 जनवरी को भाजपा के नए अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वह पार्टी के इतिहास में सबसे युवा अध्यक्ष बने। उनकी उम्र 45 साल है। दिलचस्प बात है कि जिस साल (1980) पार्टी का गठन हुआ, उसी साल नितिन नबीन का जन्म भी हुआ था। बीजेपी का नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला पीढ़ीगत बदलाव की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

युवा नेताओं पर नेतृत्व का जिम्मा

भाजपा बीते कुछ समय से युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की तरफ है। भाजपा और पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के लिए 55 वर्ष से कम उम्र के नेताओं के नेताओं को तरजीह दी है। कई राज्यों में ऐसे नेता सामने आए हैं, जिन्हें पीछे की पंक्ति से निकालकर अचानक प्रमुख पद सौंपा गया।

राजस्थान के भजनलाल शर्मा, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव को अचानक से पिछली पंक्ति से उठाकर अग्रणी पद पर बैठा दिया गया। भाजपा के वर्तमान 14 राज्यों में मुख्यमंत्री पद की स्थिति का विश्लेषण बताता है कि शपथ ग्रहण के समय केवल पांच मुख्यमंत्री 55 वर्ष से अधिक उम्र के थे। त्रिपुरा के माणिक साहा (70), गुजरात के भूपेंद्र पटेल (60), छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय (59) जैसे चेहरे शामिल हैं।

वहीं, 9 ऐसे सीएम हैं, जो शपथ ग्रहण के समय 55 साल से कम के थे। इसमें अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू (44), असम के हिमंता बिस्वा सरमा (52), दिल्ली की रेखा गुप्ता (50), गोवा के प्रमोद सावंत (48), हरियाणा के नायब सिंह सैनी (54), महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस (54), ओडिशा के मोहन चरण माझी (52), उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ (49) और उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी (46) शामिल हैं। भाजपा मुख्यमंत्री बनने वालों की औसत उम्र शपथ के समय 54 वर्ष रही है।

प्रदेशाध्यक्षों की नियुक्ति में अनुभव को तरजीह

भाजपा ने प्रदेशाध्यक्षों की नियुक्ति में अनुभव को ज्यादा तरजीह दी है। प्रदेश अध्यक्षों में से 20 की उम्र 55 वर्ष से अधिक और 14 की 55 से कम थी। राज्य अध्यक्ष बनने पर उनकी औसत उम्र 58 वर्ष रही, जो मुख्यमंत्री की औसत उम्र से अधिक है।

असम और महाराष्ट्र को छोड़कर, BJP शासित दूसरे राज्यों में पार्टी ने मुख्यमंत्री से ज़्यादा उम्र के प्रदेश अध्यक्षों को नियुक्त करके युवाओं और अनुभव के बीच संतुलन बनाया है। जब मार्च 2022 में UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार शपथ ली, तब उनकी उम्र 49 साल थी, जबकि नए नियुक्त UP BJP प्रदेश अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी 61 साल के हैं। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी 2022 में जब पद संभाला था, तब 54 साल के थे।

मोदी काबीना की औसत उम्र 59 साल

साल 2024 में पीएम मोदी अपने कैबिनेट मंत्रियों के साथ शपथ ले रहे थे। उस समय मोदी 3.0 की औसत उम्र 59 वर्ष की थी। मोदी कैबिनेट में 21 मंत्री 55 से अधिक और केवल 5 कम थे। सबसे उम्रदराज राव इंदरजीत सिंह (74), जबकि सबसे युवा रक्षा निखिल खडसे (37) हैं।

राज्यों के कैबिनेट में भी यह संतुलित पीढ़ीगत बदलाव दिखता है। दिल्ली का कैबिनेट सबसे युवा है, औसत उम्र 50 वर्ष, जहां केवल एक मंत्री (अशीष सूद, 58) 55 से अधिक थे। अरुणाचल प्रदेश, असम और उत्तराखंड के कैबिनेट भी युवा-प्रधान हैं, जहां अधिकांश मंत्री 55 से कम उम्र के हैं, लेकिन वरिष्ठ पदों पर अनुभवी नेता बने हुए हैं। ओडिशा में भी शीर्ष पर युवा झुकाव है। वहीं, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में कैबिनेट अधिक उम्र-संघटित या संतुलित है। गोवा और हरियाणा में मुख्यमंत्री युवा होने के बावजूद कैबिनेट पुरानी उम्र की ओर झुका है।

अटल-आडवाणी के दौर में भी मिली थी युवा नेताओं को तरजीह

अटल-आडवाणी के दौर में भी युवा नेताओं को भाजपा में तरजीह मिली थी। शिवराज सिंह चौहान जब एमपी के सीएम बनाए गए थे, उस समय उनकी उम्र 46 साल की थी। पीएम मोदी ने भी जब गुजरात की कमान संभाली थी। उस समय वह भी राजनीति के लिहाज से युवा थे।

बीजेपी अध्यक्ष बनाने में क्या मोदी की चली?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नितिन नबीन के चुनाव में सबसे अधिक पीएम मोदी की चली है। मोदी ने इससे एक मजूबत संदेश संघ और पार्टी को दिया है। जब यह तय करने की बात आएगी कि कौन किस पद पर रहेगा तो वह ही अंतिम अथॉरिटी होंगे। किसी लॉबी का दवाब काम नहीं आएगा। पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह की जोड़ी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर एक ऐसे चेहरे की तलाश में थी जिस पर RSS का मुहर भी हो और वह अन्य किसी वरिष्ठ नेता के करीब भी न हो। नितिन नबीन इस कसौटी पर खरे उतरते हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीजेपी नेता पहले मीडिया फ्रेंडली बनने की कोशिश किया करते थे। उनका मानना था कि लोकप्रियता उन्हें पार्टी के भीतर आगे बढ़ने में मदद करेगी। अब वही लोकप्रियता कई नेताओं के राजनीतिक करियर में बाधा बन गई है। अब पार्टी के भीतर ऊपर की सीढ़ी चढ़ने के लिए नेतृत्व की गुड बुक्स में होना जरूरी है। इससे बीजेपी कांग्रेस की तरह ही 'हाई कमांड पार्टी' बन गई है।