30 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

IIT का सपना लेकर निकला, बना एडमिशन ठग! 16.5 लाख की ठगी से खुला राज

IIT Admission Scam: आईआईटी का सपना अधूरा रह गया, लेकिन एक शख्स ने कथित तौर पर छात्रों के एडमिशन सपनों को निशाना बनाया। जिस सपने को वो खुद कभी लेकर घर से निकला था। ठगी ने पूरा रैकेट कैसे बेनकाब हो गया…चलिए जानते हैं।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Saurabh Mall

Aug 30, 2026

IIT admission scam

IIT में नहीं पहुंचा तो बनाया एडमिशन रैकेट (AI जनरेटेड इमेज)

Engineering Admission Fraud: एक वक्त था जब आरोपी युवराज कुमार शर्मा खुद IIT में जाने का सपना देखता था। इसके लिए वह कोटा भी गया। लेकिन IIT का एंट्रेंस क्लियर नहीं कर पाया। बाद में उसने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। लेकिन कुछ साल बाद यही सपना उसकी कमाई का जरिया बन गया। फर्क सिर्फ इतना था कि अब वह खुद IIT नहीं जाना चाहता था। वह दूसरे बच्चों को IIT और बड़े कॉलेजों में एडमिशन का सपना दिखा रहा था।

पुलिस का आरोप है कि इसी सपने के नाम पर उसने एक बड़ा एडमिशन रैकेट खड़ा कर लिया। दो फर्जी कॉल सेंटर बनाए गए। सोशल मीडिया के जरिए पेरेंट्स और स्टूडेंट्स को तलाशा गया। फिर लाखों रुपये लेकर उन्हें एडमिशन का भरोसा दिया गया। इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ, जब एक महिला ने 16.5 लाख रुपये की ठगी की शिकायत पुलिस से की।

इंस्टाग्राम से शुरू हुआ एडमिशन का खेल

पवई की 47 वर्षीय ग्रेसी पीटर स्वामी अपने बेटे के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन चाहती थीं। इसी दौरान उन्हें इंस्टाग्राम पर ‘techorbit1111’ नाम का अकाउंट मिला। कथित तौर पर उनसे कहा गया कि उनके बेटे को हैदराबाद के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में एडमिशन दिलाया जा सकता है। इसके बदले 16.5 लाख रुपये मांगे गए। महिला ने रकम दे दी। लेकिन एडमिशन नहीं हुआ।

इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने बैंक से संपर्क कर 16 लाख रुपये फ्रीज करा दिए। कोर्ट के आदेश के बाद पूरी रकम वापस कर दी गई। यहीं से पुलिस की जांच ने बड़ा मोड़ लिया।

दो फर्जी कॉल सेंटर और सोशल मीडिया का जाल

जांच में पुलिस ने पांच मोबाइल फोन की डिजिटल जानकारी खंगाली। इसके बाद टीम पुणे के विमान नगर, लोहेगांव और खराड़ी तक पहुंची। 16 अगस्त को छापेमारी हुई। पुलिस को दो जगहों पर फर्जी कॉल सेंटर मिले। वहां दस लोग काम करते हुए पाए गए।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी एडमिशन सीजन का इंतजार करते थे। सोशल मीडिया पर इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन से जुड़े पोस्ट तलाशे जाते थे। फिर पेरेंट्स को कॉल किया जाता था। उन्हें मैनेजमेंट या NRI कोटे से बड़े कॉलेज में सीट दिलाने का भरोसा दिया जाता था। कई बार कॉलेज प्रशासन से जुड़े व्यक्ति बनकर मुलाकात भी की जाती थी। फीस के नाम पर पैसे लिए जाते थे। एडमिशन लिस्ट आने से पहले पूरा नेटवर्क गायब हो जाता था। फोन और SIM तक नष्ट कर दिए जाते थे।

खुद IIT नहीं पहुंचा…फिर बनाया एडमिशन रैकेट

पुलिस के अनुसार, इस कथित रैकेट का मुख्य आरोपी युवराज कुमार शर्मा उर्फ सोनू कुमार है। वह बिहार के पटना जिले के पानातलाव का रहने वाला है। बचपन में पढ़ाई में अच्छा था। खासकर मैथ्स में उसकी पकड़ मजबूत थी। दादा की सलाह पर वह इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोटा गया। वहां वह दूसरे छात्रों को मैथ्स भी पढ़ाता था। IIT में सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने पुणे के 'MIT Academy' में दाखिला लिया। 2016 में सिविल इंजीनियरिंग पूरी की। नौकरी नहीं मिली तो कोचिंग सेंटर शुरू किया। बाद में उसने छात्रों को मैनेजमेंट कोटे से एडमिशन दिलाने का काम शुरू किया। 2019 में एडमिशन कंसल्टेंसी भी खोली।

पुलिस का कहना है कि 2019 से यह कथित नेटवर्क चल रहा था। अब तक 30 मोबाइल नंबरों का पता चला है। मुंबई, नागपुर, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के मामलों से भी इसके लिंक मिले हैं। सात लोगों ने पुलिस से संपर्क कर पैसे देने के बावजूद एडमिशन नहीं मिलने का आरोप लगाया है। यानी जिस एडमिशन के सपने को युवराज खुद कभी पूरा नहीं कर पाया, पुलिस के मुताबिक उसी सपने को उसने दूसरों के लिए कथित ठगी का हथियार बना लिया।