
Vietnam student death protest: भारत के Gen Z आंदोलन की गूंज 5000 किमी दूर वियतनाम तक पहुंच गई है। दरअसल,18 साल की छात्रा की मौत के मामले में वियतनामी युवाओं ने न्याय के लिए विरोध करना शुरु कर दिया है। भारत जैसा प्रदर्शन भड़कने के डर से वहां की सरकार अलर्ट मोड पर है।, फोटो सोर्स- AI
India Gen Z protest impact Vietnam: भारत में हुए जेन जी प्रोटेस्ट का असर करीब 5 हजार किलोमीटर दूर वियतनाम में भी दिखाई दे रहा है। यहां बड़ी संख्या में युवा 15 महीने पुराने एक मामले में फिर से जांच करने और दोषी को सजा देने की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर पूरे हफ्ते इस मुद्दे पर लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि कॉकोरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जब जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा था, तब वियतनाम सरकार ने मीडिया संस्थानों को इस बारे में ज्यादा खबरें न दिखाने की सख्त हिदायत दी थी। उसे डर था कि वियतनाम में भी भारत जैसा आंदोलन हो सकता है। बीते कुछ दिनों में जिस तरह से 18 वर्षीय छात्रा की मौत का मामला तूल पकड़ रहा है, उसे देखकर लगता है कि सरकार का डर सही साबित हो सकता है।
30 मई 2025 को, वियतनाम की नेशनल असेंबली के पूर्व डिप्टी 64 वर्षीय गुयेन सी कुओंग (Nguyen Sy Cuong) अपनी लग्जरी BMW कार चला रहे थे। अचानक तेज़ रफ़्तार कार दूसरी लेन में चली गई और सामने से आ रही एक मोटर बाइक को उड़ा दिया। इस हादसे में 18 वर्षीय छात्रा डो न्गोक फुओंग थुई (Do Ngoc Phuong Thuy) उर्फ मिका की मौत हो गई। जबकि इसके पिता को भी गंभीर चोटें आईं। कुओंग की पत्नी संस्कृति, खेल और पर्यटन मंत्री हैं। इतने बड़े आदमी का नाम सामने आने के बाद प्रशासन के भी हाथ पांव फूल गए। मामले को रफा-दफा करने की कोशिश हुई और सरकार इसमें लगभग कामयाब भी हो गई। मृतका के पिता का एक बयान सामने आया कि वह घटना को भूलकर अब आगे बढ़ना चाहते हैं। यह भी बताया गया कि गुयेन सी कुओंग के खिलाफ इसलिए कोई मुकदमा नहीं चलाया गया, क्योंकि पीड़ित परिवार ने ही उनके खिलाफ केस करने से इंकार कर दिया है।
वियतनाम सरकार और गुयेन सी कुओंग शायद यह मानकर चल रहे होंगे कि मामला खत्म हो गया है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से इस मुद्दे पर सोशल मीडिया उबल रहा है, उससे कुओंग की परेशानी बढ़ सकती है। जिस जगह पर हादसा हुआ था, वहां युवा पहुंच रहे हैं और मृतका को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इस जगह को मेमोरियल ट्री 55 या ट्री ऑफ जस्टिस नाम दिया गया है। इस मामले में रसूखदार व्यक्ति का नाम शामिल होने के चलते मीडिया भी लगभग खामोश बना हुआ था। हादसे के कुछ दिन बाद ही इससे जुड़ी खबरें गायब हो गई थीं। लेकिन बीते सोमवार को जब सोशल मीडिया पर मृतका को जस्टिस दिलाने की मांग ने जोर पकड़ा तो मीडिया को भी कवरेज देनी पड़ी।
अधिकांश लोगों का मानना है कि गुयेन सी कुओंग बेहद प्रभावशाली हैं, इस वजह से उन्हें बचाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर #NguyenSyCuong हैशटैग के साथ मृतका को न्याय दिलाने की मांग करने वाले अधिकांश यूजर्स खुद को जेन जी बता रहे हैं। उनका यह भी आरोप है कि सरकार ने डिजिटल मंच पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फेसबुक, इंस्टाग्राम और X जैसे प्लेटफॉर्म पर इन संदेशों को फैलाने के तरीके ढूंढ निकाले। उनकी मांग है कि इस हादसे की सार्वजनिक जांच हो और इसके लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति को जवाबदेह ठहराया जाए। युवा मास्क पहनकर उस पेड़ (नंबर 55) पर फूल चढ़ा रहे हैं, जहां हादसा हुआ था; यह शोक जताने और न्याय की मांग करने का एक तरीका है। हालांकि, सरकार ने सफाई कर्मियों को एक्टिव कर रखा है कि जैसे ही कोई फूल चढ़ाए, तुरंत उसे वहां से हटा दें। इसे देखते हुए अब जेन जी ने ऑनलाइन एक वर्चुअल पेड़ खड़ा कर दिया गया है, जिस पर लाखों लोग श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इतना ही नहीं, इस पेड़ को Google Maps पर अपनी लोकेशन और एक नाम भी मिला – 'जस्टिस ट्री'।
हनोई की एक लॉ फर्म के वकील ट्रान दाई लैम का कहना है कि शायद उस एक साल की खामोशी ने युवाओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है। युवा अब सिर्फ बड़ों से यह नहीं सुनना चाहते कि ‘इंसाफ पर भरोसा रखो’; वे असल में इंसाफ होते हुए देखना चाहते हैं। वहीं, सरकार जेन जी के गुस्से को लेकर कुछ हद तक डरी हुई है। एक टीवी प्रोग्राम में मृतका के पिता को आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने कहा कि वो जांच से संतुष्ट हैं और अब इस मामले को भूलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। हालांकि, इससे युवाओं का गुस्सा शांत होगा, इसकी आशंका कम है। वियतनाम सरकार ने भारत में जेन जी प्रोटेस्ट और उसके असर को देखा है। इसलिए वह आशंकित है कि अगर वियतनाम में युवा सड़कों पर उतर आए तो उन्हें संभालना नामुमकिन हो जाएगा। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने पहले ही सरकारी मीडिया संस्थानों को नई दिल्ली में चल रहे युवा-नेतृत्व वाले आंदोलन की कवरेज कम करने की चेतावनी दी थी। आंतरिक दिशा-निर्देशों में कहा गया था कि इससे वियतनाम में भी सरकार-विरोधी तत्व एक्टिव हो सकते हैं।
Updated on:
21 Aug 2026 01:44 pm
Published on:
21 Aug 2026 01:43 pm
