
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Photo-IANS)
Illegal migrants: भारत सरकार घुसपैठियों को लेकर आक्रामक नीति अपना रही है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद इसकी कई तस्वीर भी सामने आई। खुद गृह मंत्री अमित शाह कई बार बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के उत्तरी इलाकों का दौरा करते हैं। वह सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों व जिला प्रशासन की बैठक लेते हैं। एकबार फिर उन्होंने अवैध प्रवासियों को लेकर बड़ा बयान दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। केवल देश के नागरिकों को रहने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि घुसपैठिये देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकी के लिए खतरा हैं। गृह मंत्री शाह ने खुफिया ब्यूरो (आईबी) की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले आठ महीनों में सभी स्थल सीमा से लगे राज्यों का दौरा करने के बाद, हमने राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा को लेकर चार-सूत्रीय दृष्टिकोण वाला एक दस्तावेज साझा किया है। हमारा लक्ष्य बहुत कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है।
उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा नीति को वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा व संसाधनों को लेकर असुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, बढ़ते कट्टरपंथ और साइबर मिसइंफोर्मेशन वारफेयर को ध्यान में रखते हुए बनाना होगा। अमित शाह ने कहा कि एक विकसित भारत के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा तंत्र एक पूर्व-शर्त है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को हर क्षेत्र में सबसे आगे उभरना है, तो इसकी आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करना होगा।
दो दिवसीय NSS सम्मेलन के दौरान, खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों ने घुसपैठ, आतंकी समूहों के खिलाफ रीयल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने और उनके रसद और वित्तपोषण नेटवर्क को ध्वस्त करने सहित अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की।
अमित शाह ने पहली बार घुसपैठियों को लेकर रोकने के लिए इस तरह की सख्त टिप्पणियां नहीं की है। उन्होंने 27 मार्च को लोकसभा में आव्रजन एवं विदेशी विधेयक, 2025 पर बहस के जवाब में भी इसी तरह की बात कही थी। उस समय उन्होंने कहा था कि भारत धर्मशाला नहीं है जहां कोई भी किसी भी उद्देश्य से आकर रह सकता है।
गृह मंत्री ने तर्क दिया था कि संसद को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने वालों को रोकने का अधिकार है, तथा सीमाओं पर संवेदनशील स्थानों और सेना प्रतिष्ठानों को सभी के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा था कि जो लोग वैध तरीके से भारत की समृद्धि में योगदान देने आते हैं, उनका स्वागत है, लेकिन अवैध रूप से प्रवेश करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी तरह की भाषा का प्रयोग किया था, जब 19 मई को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत सात साल की सजा काटने के बाद निर्वासन का सामना कर रहे एक श्रीलंकाई तमिल नागरिक की हिरासत में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा था कि क्या भारत को दुनिया भर के शरणार्थियों की मेजबानी करनी है? हम 140 करोड़ की आबादी से ही जूझ रहे हैं। यह कोई धर्मशाला नहीं है कि हम दुनिया भर के विदेशी नागरिकों को यहां रख सकें।"
पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए शाह ने मंगलवार को कहा कि अगर उन्होंने नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद की समस्याओं के विकराल रूप लेने से पहले ही उनका अनुमान लगा लिया होता, तो देश को दशकों तक इसके परिणाम नहीं भुगतने पड़ते। उन्होंने कहा कि देश के तीन आंतरिक सुरक्षा हॉटस्पॉट की चुनौतियों को समाप्त कर दिया गया है, और इसका श्रेय राज्य पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को दिया।
Updated on:
26 Aug 2026 07:36 am
Published on:
26 Aug 2026 07:36 am
