6 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

UN Map Resolution: भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में दिया वोट, लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर कही बड़ी बात

India on UN World Map Resolution: संयुक्त राष्ट्र के विश्व मानचित्र प्रस्ताव पर भारत ने पक्ष में वोट किया। विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारतीय क्षेत्र को आधिकारिक नक्शे के अनुसार दिखाने की बात दोहराई।
2 min read
Google source verification
india on Jammu Kashmir Ladakh Map.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल। (Photo- ANI)

UN World Map Resolution: भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है, जिसमें दुनिया के नक्शे में सभी देशों के क्षेत्रफल को सही अनुपात में दिखाने वाले मानचित्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से यह जानकारी रविवार को दी गई।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया कि इस प्रस्ताव का मतलब किसी एक खास विश्व मानचित्र को मान्यता देना नहीं है। यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित इलाकों या जगहों के नाम से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर भी कोई फैसला नहीं करता।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर स्थिति स्पष्ट की

भारत ने वोट की वजह बताते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर अपनी स्थिति एक बार फिर स्पष्ट की। भारत ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के पूरे संप्रभु क्षेत्र को भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। भारत के क्षेत्र को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर हमारी स्थिति साफ है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।'

प्रस्ताव का विरोध करने वाला अमेरिका एक मात्र देश

दुनिया के नक्शे में सभी देशों के क्षेत्रफल को सही अनुपात में दिखाने वाले UN मानचित्र के खिलाफ अमेरिका ने वोट दिया, जबकि जबकि एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने तटस्थ रुख अपनाते हुए मतदान से दूरी बनाई थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने मतदान किया।

क्या है उद्देश्य

UN का यह प्रस्ताव दुनिया के नक्शे में देशों और महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाने की दिशा में है। इसका मकसद मर्केटर प्रोजेक्शन की वजह से पैदा होने वाली असमानता को कम करना और ‘इक्वल अर्थ’ जैसे ऐसे नक्शों को बढ़ावा देना है, जिनमें अफ्रीका समेत दूसरे क्षेत्रों का वास्तविक आकार बेहतर तरीके से नजर आता है।

हालांकि यह ध्यान देने वाली बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। इसका मतलब है कि देशों, स्कूलों, किताबों के प्रकाशकों, तकनीकी कंपनियों को मर्केटर नक्शे को हटाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग