25 जून 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जमीन से समुद्र की ओर: क्या भारत अपना रणनीतिक नजरिया बदल रहा है?

India's strategy in the Indian Ocean: भारत ने बीते कुछ सालों में समुद्री क्षेत्र में भारी निवेश किया है। साथ ही, अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पढ़ें पूरी खबर...
2 min read
Google source verification
Great Nicobar Island Development

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट (इमेज सोर्स: ANI एक्स)

India changing its strategic outlook: वैश्विक समुद्री व्यापार में तेजी के साथ-साथ समुद्री इलाके के आर्थिक व रणनीतिक महत्व भी बढ़ रहे हैं। भारत बीते कुछ दशकों से इस परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए न सिर्फ मौजूदा कनेक्टिविटी कॉरिडोर में शामिल हो रहा है, बल्कि नए मार्गों व साझेदारियों के माध्यम से उभरते समुद्री नेटवर्क का हिस्सा भी बन रहा है। भारत ने बीते कुछ सालों से भूमि सीमा केंद्रित नजरिये से अलग करके खुद को हिंद महासागर की भौगोलिक निकटता का रणनीतिक लाभ लेते हुए समुद्री राष्ट्र के रूप में परिभाषित किया है।

इस बदलाव के परिणाम भी दिखते हैं। भारत IORA में सक्रिय भागीदारी निभाता है। BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) के माध्यम से बंगाल की खाड़ी में व्यापार को जोड़ने और QUAD के जरिए मेरिटाइम सिक्योरिटी बढ़ाने के काम में जुटा है। भारत अब समुद्र को दो देशों को अलग करने वाली समस्या के बजाए एक पुल के रूप में देख रहा है। भारत अब रणनीतिक रूप से पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे दूर-दराज के देशों को भी समुद्री पड़ोसी मानकर चलता है।

समुद्री क्षेत्र में भारत कर रहा बड़ा बदलाव

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम में एसोसिएट फेलो सायंतन हलदर ने कहा कि व्यवहारिक स्तर पर भारत समुद्री क्षेत्र में बड़े बदलाव ला रहा है। शिपिंग और शिपबिल्डिंग में भी भारत सरकार ने बीते कुछ सालों में खास ध्यान दिया है। भारत का लक्ष्य आने वाले कुछ सालों में शिपबिल्डिंग क्षेत्र में विश्व के टॉप-5 देशों में शामिल होना है। इस दिशा में भारत जापान और दक्षिण कोरिया के साथ अपने रिश्तों को और भी मजबूत कर रहा है। साल 2025 की शुरुआत में भारत ने जापान के साथ समुद्री सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौते किए।

इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन, क्वाड और IORA जैसे मंचों के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को लगातार बढ़ाया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पारंपरिक और गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा व कनेक्टिविटी को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता है। एसोसिएट फेलो सायंतन हलदर ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति का फायदा उसके दो पड़ोसी देश नेपाल और भूटान भी उठाते हैं।

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट में भारी भरकम निवेश

भारत रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण निकोबार द्वीप समूह पर भी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को तैयार कर रहा है। सरकार यहां अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, ड्यूल-यूज एयरपोर्ट, टाउनशिप और पावर प्लांट का निर्माण की तैयारी में है। रणनीतिक रूप से यह मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर है। जो वैश्विक व्यापार का प्रमुख चोक प्वाइंट भी है।

हिंद महासागर में तैनात रहेंगे मेड इन इंडिया जहाज

भारत ने सैन्य रणनीति में भी बदलाव किया है। भारतीय नौसेना में अब अधिकतर मेड इन इंडिया जहाज कमिशन किए जा रहे हैं। भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भर भारत के तहत तेज गति से अपनी क्षमता बढ़ाई है। 2014 से अब तक 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत व पनडुब्बियां कमीशन की जा चुकी हैं। ये सभी हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाएगी। 2025-26 में कई बड़े कमीशनिंग हुए, जिसमें प्रोजेक्ट 17A (निलगिरि क्लास स्टील्थ फ्रिगेट्स) जैसे INS हिमगिरि, उदयगिरि, दुनागिरी और INS विक्रांत (स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर) शामिल हैं। भारतीय नौसेना ने साल 2030 तक 160 युद्धपोत का बेड़ा बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।