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JPSC-JSSC Case: सरकार ने नहीं दाखिल किया एफिडेविट, वकील बोले- भर्ती में हुआ मास करप्शन, दागी नवनियुक्तों को बचा रही सरकार

JPSC-JSSC Exam Cancellation row: JPSC और JSSC-CGL सहित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। तय समय सीमा के भीतर सरकार द्वारा हलफनामा दाखिल न कर पाने के बाद, वकील कुमार हर्ष ने परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाया।
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रांची

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Anand Shekhar

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Updated: 15 Sep 2026, 6:07 PM IST

advocate on JPSC JSSC CGL case

अधिवक्ता कुमार हर्ष (फोटो- ANI)

JPSC-JSSC Case: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित CGL भर्ती परीक्षा से जुड़े मामलों पर मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा हलफनामा दाखिल न करने पर गहरी नाराजगी जताई। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को 18 सितंबर को सुबह 10:30 बजे तक अपना जवाब अनिवार्य रूप से दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया। इस बीच, चयनित न होने वाले योग्य उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील कुमार हर्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

आश्वासन के बावजूद सरकार ने नहीं जमा किया हलनामा

कोर्ट में उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील कुमार हर्ष ने मीडिया को बताया कि इस मामले में पहली सुनवाई 20 अगस्त को हुई थी। उस समय, कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट आदेश दिया था कि वह 7 तारीख से पहले अपना हलफनामा दाखिल करे, ताकि उम्मीदवारों को उसके आधार पर जवाब दाखिल करने का पर्याप्त मौका मिल सके।

कुमार हर्ष ने बताया कि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को यह भी आश्वासन दिया था कि परीक्षा रद्द करने के आदेश से संबंधित सभी सबूत, जांच के तथ्य और अब तक की घटनाओं का क्रम रिकॉर्ड पर रखा जाएगा, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी सरकार हलफनामा दाखिल करने में पूरी तरह विफल रही।

दागी नवनियुक्तों को बचा रही सरकार : वकील

वकील कुमार हर्ष ने 11वीं-13वीं JPSC और JSSC-CGL परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अयोग्य लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई, जिससे काबिल और होनहार छात्र चुने नहीं जा सके।

वकील ने बताया कि उम्मीदवार परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले का समर्थन करते हैं और सरकार को उसी फैसले का बचाव करने के लिए ठोस सबूतों के साथ हलफनामा दाखिल करना चाहिए था। लेकिन, सरकार अब तक हलफनामा दाखिल नहीं कर पाई है, जिससे पता चलता है कि वह दागदार नए नियुक्त लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

18 सितंबर को होगी सुनवाई

वकील कुमार हर्ष के अनुसार, कोर्ट ने अगली सुनवाई 18 सितंबर को सुबह 10:30 बजे तय की है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उस दिन सुनवाई होगी, चाहे सरकार हलफनामा दाखिल करे या न करे।

परीक्षा रद्द करने के फैसले पर लगी है रोक

यह विवाद तब शुरू हुआ जब झारखंड सरकार ने अगस्त में कथित अनियमितताओं के कारण JPSC, JSSC और अन्य एजेंसियों द्वारा आयोजित कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फ़ैसला किया। 22 परीक्षाओं को रद्द करने के साथ-साथ, सरकार ने अन्य परीक्षाओं को टालने और कई मामलों में CID जांच के आदेश देने का भी फ़ैसला किया था। इसके बाद, चुने गए और नियुक्त उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने कई मामलों में सरकारी आदेशों के लागू होने पर रोक लगा दी और प्रभावित कर्मचारियों को फिलहाल नौकरी जारी रखने की अनुमति दे दी।