
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर (फोटो- IANS)
JPSC-JSSC Protest: झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन और विरोध के बीच विपक्ष ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी रांची में प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से मिलने क्यों नहीं गए।
इस राजनीतिक विवाद और विपक्ष के तीखे सवालों के बीच पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राजेश ठाकुर ने कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों की शिकायतों को बहुत गंभीरता से लिया और आंदोलन के शुरुआती दौर से ही ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए थे। ठाकुर ने कहा कि अगर सरकार ने तेजी और संवेदनशीलता से काम नहीं किया होता तो राहुल गांधी खुद अभ्यर्थियों के बीच जरूर मौजूद होते।
राहुल गांधी के रांची न आने के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने झारखंड के मौजूदा हालात की तुलना दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन से की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद सड़कों पर तभी उतरते हैं जब इंसाफ के दरवाजे बंद हो जाते हैं और सरकारी मशीनरी ताकत का इस्तेमाल करने लगती है। दिल्ली प्रोटेस्ट का जिक्र करते हुए ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार शुरू में स्टूडेंट्स से कोई बातचीत या बातचीत करने को तैयार नहीं थी। राहुल गांधी के युवाओं की आवाज उठाने के बाद ही केंद्र सरकार बातचीत की टेबल पर आने को मजबूर हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रोटेस्ट करने वालों पर पेलेट गन, लाठीचार्ज और यहां तक कि गोलियां भी चलाई गईं और बहुत ज्यादा दबाव के बाद ही जिम्मेदार लोगों से इस्तीफा लिया गया।
राजेश ठाकुर ने आगे कहा कि गलतियों और उसके बाद हुए इस्तीफ़ों के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान जैसे नेताओं को अहम चेहरे के तौर पर पेश करने की कोशिशें जारी हैं, जिससे पता चलता है कि दिल्ली प्रोटेस्ट के बाद की गई कार्रवाई सिर्फ़ दिखावा थी। इसके उलट, झारखंड की महागठबंधन सरकार ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों का सम्मान किया और छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग करने के बजाय उनसे सीधे बातचीत करने का रास्ता चुना।
राजेश ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी देश के स्टूडेंट्स और नौकरी के इच्छुक लोगों की सभी जायज मांगों को लेकर उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार ने आंदोलन को दबाने के बजाय पारदर्शी जांच और कार्रवाई का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पूरे देश में स्टूडेंट्स की आवाज को बुलंद करने के लिए लगातार कैंपेन चला रहे हैं। अगर कभी ऐसा लगा कि झारखंड में स्टूडेंट्स की जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है या किसी भी लेवल पर अन्याय हो रहा है, तो राहुल गांधी निश्चित रूप से स्टूडेंट्स के साथ खड़े होंगे। फिलहाल, बातचीत से समाधान निकाला जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार ने खुद तुरंत कदम उठाए हैं।
झारखंड सरकार के मंत्रियों और विरोध कर रहे छात्रों के बीच हुई कई दौर की बैठकों का जिक्र करते हुए, राजेश ठाकुर ने कहा कि सरकार ने आंदोलन को सुलझाने और युवाओं को न्याय दिलाने के लिए ईमानदारी से कोशिशें की हैं। उन्होंने बताया कि बैठकों के दौरान छात्र प्रतिनिधि कई अहम बातों पर सहमत दिखे। हालांकि, अब विरोध स्थल पर कुछ ऐसे लोग आ रहे हैं जो गलत जानकारी फैलाकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी बाकी 10% मांगों पर समझदारी से विचार करें, क्योंकि सरकार पहले ही उनकी 90% मांगें मान चुकी है।
बैठक के नतीजों पर राजेश ठाकुर ने कहा कि बातचीत से बहुत ठोस और अहम नतीजे निकले हैं। CID जांच और छात्रों की मांगों को लेकर बढ़ते दबाव के बीच, JPSC के तीन सदस्यों डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है और राजभवन ने उनके इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं। इसके अलावा, सरकार 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) रद्द करने, TDPL एजेंसी की CID और ED से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल करने पर सहमत हो गई है।
Updated on:
09 Aug 2026 09:10 pm
Published on:
09 Aug 2026 09:09 pm
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