
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ सिद्धारमैया (Photo-IANS)
कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस के भीतर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया बार-बार कहते रहे कि 'सीट खाली नहीं है, मैं पूरे 5 साल सीएम रहूंगा', पर कांग्रेस हाई कमान (राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे) ने उनकी एक नहीं सुनी।
सीएम सिद्धारमैया को आज अपने कैबिनेट मंत्रियों को ब्रेकफास्ट पर बुलाकर यह कहना पड़ा कि हाई कमान के आदेश पर वे इस्तीफा देने जा रहे हैं। दोपहर 3 बजे वे औपचारिक इस्तीफा सौंप देंगे। उनकी जगह डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
यह फैसला अचानक नहीं आया। 2023 के चुनाव के बाद से ही सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच तनाव चल रहा था। दोनों ही बड़े चेहरे थे, लेकिन हाई कमान ने शुरू से ही कुछ समझौता कराया था।
आज सुबह सिद्धारमैया ने अपने सरकारी आवास पर मंत्रियों को बुलाया। स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव समेत कई नेता वहां मौजूद थे। मीटिंग में माहौल थोड़ा भावुक था।
सिद्धारमैया ने साफ कहा- हाई कमान ने मुझे नई लीडरशिप के लिए रास्ता देने को कहा है। शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनाना है।
इस घोषणा के बाद शिवकुमार ने भी सिद्धारमैया के पैर छुए और गले मिले। कई मंत्रियों ने इसे पार्टी की एकता का अच्छा संकेत बताया।
सिद्धारमैया ने पिछले तीन साल में कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे पूरे टर्म तक रहेंगे। उन्होंने शिवकुमार की महत्वाकांक्षा को भी माना, लेकिन अपनी कुर्सी नहीं छोड़ने की जिद पकड़े रहे। लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने आखिरकार सख्त फैसला लिया।
पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि 2023 में ही ढाई-ढाई साल का अनौपचारिक फॉर्मूला तय हो गया था। सिद्धारमैया ने इसे मानने से इनकार कर दिया। पिछले कुछ महीनों में शिवकुमार गुट का दबाव बढ़ता गया। तीन साल पूरे होने के बाद अटकलें तेज हो गईं।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई बैठकों में हाई कमान ने सिद्धारमैया को राज्यसभा सीट और पार्टी में बड़ी भूमिका का ऑफर दिया। पार्टी अनुशासन की वजह से सिद्धारमैया को मानना पड़ा। वे लंबे समय से कांग्रेस के वफादार रहे हैं। उन्होंने कहा भी कि हाई कमान का फैसला अंतिम है।
कांग्रेस को 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करनी है। सिद्धारमैया और शिवकुमार का झगड़ा लंबे समय से पार्टी की छवि खराब कर रहा था। हाई कमान चाहती थी कि यह कलह खत्म हो जाए। शिवकुमार वोकालिगा समुदाय का बड़ा चेहरा हैं।
उन्हें मौका देकर पार्टी जातीय समीकरण साधना चाहती है। साथ ही, नई लीडरशिप के साथ तरोताजा छवि पेश करने की कोशिश है। सिद्धारमैया को सम्मानजनक निकास देकर पार्टी ने वरिष्ठ नेता का भी ख्याल रखा।
शिवकुमार शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। नया कैबिनेट बनाने में चुनौती होगी क्योंकि मंत्रियों के बीच समायोजन करना आसान नहीं।
सिद्धारमैया अब पार्टी के बड़े नेता के रूप में सक्रिय रहेंगे।कांग्रेस में यह घटनाक्रम फिर साबित करता है कि हाई कमान का फैसला सबसे ऊपर होता है।
Published on:
28 May 2026 02:42 pm
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