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कर्नाटक के गवर्नर ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी पर जताई चिंता, मुख्य सचिव को लिखा पत्र

BMIC Project: कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बीएमआईसी प्रोजेक्ट और बिदादी के जीबीआईटी प्रोजेक्ट को लेकर चिंता जताते हुए मुख्य सचिव से जांच और उचित कार्रवाई करने को कहा है।
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भारत

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Harshul Mehra

Aug 16, 2026

karnataka governor bmic project delay land issue

कर्नाटक के गवर्नर ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी पर जताई चिंता। फोटो-IANS

BMIC Project: कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य की महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में हो रही देरी को लेकर मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखा है। राज्यपाल ने अपने पत्र में बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (बीएमआईसी/एनआईसी) प्रोजेक्ट और बिदादी में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) को लेकर चिंता जताई है।

बीएमआईसी प्रोजेक्ट को लेकर राज्यपाल ने जताई चिंता

बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट का प्रबंधन नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (एनआईसी) नाम की एक निजी कंपनी करती है। राज्यपाल ने बताया कि उन्हें अब्राहम टीजे और बैरामंगला एवं कुंचागरनहल्ली पंचायतों के किसान कल्याण संघ की ओर से एक विस्तृत ज्ञापन मिला है। इसमें बीएमआईसी प्रोजेक्ट के तहत जमीन के इस्तेमाल और उससे जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं।

6,757 एकड़ सरकारी जमीन को लेकर दावा

ज्ञापन में याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि बीएमआईसी प्रोजेक्ट के तहत पेरिफेरल और लिंक सड़कों के साथ अन्य संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब 376 एकड़ सरकारी जमीन का इस्तेमाल किया गया। वहीं, उनका दावा है कि लगभग 6,757 एकड़ सरकारी जमीन का इस्तेमाल नहीं हुआ है और यह जमीन अभी भी एनआईसी से जुड़ी कंपनियों या अन्य निजी पक्षों के कब्जे या नियंत्रण में हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने इसके लिए किसी कानूनी अधिकार के न होने का भी दावा किया है।

जीबीआईटी-बिदादी प्रोजेक्ट पर भी सवाल

राज्यपाल ने बिदादी में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) प्रोजेक्ट को लेकर भी चिंता जताई है। खबरों के अनुसार, इस परियोजना के लिए नौ गांवों में फैली करीब 7,431 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिग्रहण के लिए चुनी गई जमीन पर बड़े पैमाने पर खेती और उससे जुड़ी गतिविधियां होती हैं।

खेती और आजीविका पर असर का दावा

ज्ञापन में दावा किया गया है कि प्रस्तावित प्रोजेक्ट से इलाके में कृषि और आजीविका से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, परियोजना से 5.03 लाख से अधिक फलदार पेड़, सालाना करीब 49.4 लाख लीटर दूध का उत्पादन और 8,400 से ज्यादा पशु प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली करीब 840 एकड़ जमीन, रेशम किसानों से जुड़ी लगभग 501 एकड़ शहतूत की खेती और करीब 12,400 पेड़ों वाले सोशल फॉरेस्ट्री प्लांटेशन पर भी असर पड़ने का दावा किया गया है।

राज्यपाल ने मुख्य सचिव से जांच और कार्रवाई को कहा

थावरचंद गहलोत ने किसान संगठनों की ओर से मिले ज्ञापन को मुख्य सचिव शालिनी रजनीश के पास भेजते हुए मामले की जांच और उचित कार्रवाई करने को कहा है। राज्यपाल ने इलाके में जमीन के इस्तेमाल, खेती और लोगों की आजीविका से जुड़े मुद्दों के महत्व पर भी जोर दिया है।

हाईकोर्ट भी बीएमआईसी प्रोजेक्ट पर जता चुका है चिंता

इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट लंबे समय से लंबित बीएमआईसी/एनआईसी प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर टिप्पणी कर चुका है। कोर्ट ने इसे राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया था। कोर्ट ने कहा था कि 111 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित एक्सप्रेसवे में 25 वर्षों के दौरान केवल एक किलोमीटर का निर्माण हो पाया है, जबकि निजी कंपनियां इससे लाभ उठा रही हैं।

कुमारस्वामी भी प्रोजेक्ट अपने हाथ में लेने की कर चुके हैं मांग

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी कर्नाटक सरकार से बीएमआईसी प्रोजेक्ट को अपने हाथ में लेने और अतिरिक्त जमीन वापस लेने को कहा था। वहीं, राज्य सरकार ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की बात कही थी।