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लोहागढ़ मर्डर केस: सिया गोयल का पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों चाहती है पुलिस, आखिर बिना सबूतों के कैसे खुलेगा हत्या राज

लोहगढ़ मर्डर केस में पुलिस Siya Goyal का Polygraph Test कराने की तैयारी में है। बिना चश्मदीद और CCTV सबूतों के पुलिस डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों से केस मजबूत करने में जुटी है।
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पुणे

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Ankit Sai

Jul 01, 2026

ketan agarwal

सिया गोयल का पॉलीग्राफ टेस्ट

Ketan Agarwal Murder Case: लोहागढ़ मर्डर केस में पुलिस अब जांच को और मजबूत करने में जुट गई है। केतन अग्रवाल की मौत के मामले में सिया गोयल का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की तैयारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इसका मकसद टेस्ट रिपोर्ट को सबूत बनाना नहीं, बल्कि ऐसे सुराग हासिल करना है, जिन्हें डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों के जरिए अदालत में साबित किया जा सके। मामले में न कोई चश्मदीद है और न ही हत्या का सीधा वीडियो सबूत।

पॉलीग्राफ टेस्ट से क्या पता करना चाहती है पुलिस?

जांच में पुलिस सिया गोयल का पॉलीग्राफ कराने की तैयारी कर रही है। हालांकि कानून के मुताबिक पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट को सीधे अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद सिर्फ नए सुराग हासिल करना है। अगर पूछताछ के दौरान कोई ऐसी जानकारी सामने आती है, जिसे बाद में डिजिटल या फॉरेंसिक तरीके से साबित किया जा सके, तो वही सबूत अदालत में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, 'इसका मकसद पॉलीग्राफ रिपोर्ट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि छिपी हुई ऐसी जानकारियों का पता लगाना है जिनकी बाद में कानूनी रूप से मान्य डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों से पुष्टि की जा सके।'

न कोई चश्मदीद, न हत्या का वीडियो, पुलिस के सामने बड़ी चुनौती

इस केस में पुलिस के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि हत्या का कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। ऐसा कोई चश्मदीद नहीं है जिसने केतन को किले से गिरते हुए देखा हो। वहीं घटना का कोई CCTV फुटेज भी मौजूद नहीं है। पुलिस के मुताबिक CCTV में सिर्फ सिया के प्रेमी चेतन चौधरी को इलाके के पास हुडी पहने देखा गया है। लेकिन सिर्फ वहां मौजूद होना हत्या साबित करने के लिए काफी नहीं है।

पुलिस ने घटना को समझने के लिए डमी के जरिए क्राइम सीन दोबारा बनाया था, लेकिन जांच अधिकारी भी मानते हैं कि इससे पुख्ता वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालना मुश्किल है। इससे यह पता नहीं लगाया जा सकता कि पीड़ित को जान-बूझकर धक्का दिया गया था या वह गलती से फिसल गया था।

एक भी कमजोर कड़ी पूरे केस को कमजोर कर सकती है

जांच अधिकारियों का कहना है कि यह मामला पूरी तरह सबूतों पर आधारित है। ऐसे मामलों में हर कड़ी का आपस में जुड़ना जरूरी होता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, अगर बचाव पक्ष उस चेन की एक भी जरूरी कड़ी तोड़ने में कामयाब हो जाता है, तो प्रॉसिक्यूशन का केस काफी कमजोर हो सकता है।

डिजिटल सबूतों पर टिकी पुलिस की उम्मीद

पुलिस अब मोबाइल डेटा, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर ज्यादा ध्यान दे रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि अगर हत्या से पहले की प्लानिंग या साजिश से जुड़े डिजिटल सबूत मिलते हैं तो केस मजबूत हो सकता है। पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, सिया कथित तौर पर केतन से शादी नहीं करना चाहती थी और इसी वजह से हत्या की साजिश रची गई। हालांकि इसे साबित करने के लिए पुलिस को मजबूत सबूतों की जरूरत है।

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