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Lucknow Fire: रिहायशी नक्शे पर बना कॉम्प्लेक्स, अंदर चल रही थीं दुकानें और लाइब्रेरी; लखनऊ अग्निकांड में हुआ खुलासा

Lucknow Coaching Fire: लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जिस तीन मंजिला इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई, उसका नक्शा रिहायशी भवन के रूप में पास हुआ था, लेकिन उसमें अवैध रूप से दुकानें और शैक्षणिक संस्थान संचालित किए जा रहे थे।

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लखनऊ

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Ashib Khan

Jun 23, 2026

Lucknow Coaching Fire

लखनऊ में इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत (Photo-IANS)

Lucknow Coaching Centre Fire: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर को तीन मंजिला इमारत में आग लग गई। इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। जिस बिल्डिंग में आग लगी, वहां एक कोचिंग सेंटर भी चलता था। हादसे के बाद प्रशासन ने इमारत के निर्माण और अनियमितताओं को लेकर जांच शुरू कर दी है। इसी बीच प्रारंभिक जांच में बिल्डिंग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। 

हादसे के संबंध में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चार अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया गया है।

आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत थी बिल्डिंग

राजधानी लखनऊ के ऊषा मर्ग पर बनी यह बिल्डिंग रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के तौर पर स्वीकृत थी। लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) के रिकॉर्ड और लखनऊ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के हाउस टैक्स डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक इमारत का नक्शा घर के तौर पर मंजूर किया था।  

हालांकि इसमें अवैध रूप से दुकानें और शैक्षणिक संस्थान संचालित किए जा रहे थे। वहीं भवन मालिकों पर आरोप है कि उन्होंने साल 2014 में इसे कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बदल दिया। 

यह बिल्डिंग वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला की बताई जा रही है। आग लगने के समय भवन में संचालित एक एनीमेशन सेंटर में कई छात्र मौजूद थे। अधिकांश मृतक दूसरी मंजिल पर फंस गए थे।

जांच में कई खामियां आई सामने

हादसे की जांच के बाद कई गंभीर सुरक्षा खामियां सामने आई है। बिल्डिंग में इमरजेंसी एग्जिट नहीं था। इसके अलावा छत तक जाने का रास्ता भी बंद था। जिस कारण से लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। 

अधिकारियों के मुताबिक इमारत प्रवेश द्वार पर अंगूठे के निशान (थंब इम्प्रेशन) से संचालित इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम लगा था। जब आग लगी तो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया और यह ऑटोमैटिक लॉक हो गया। जिससे लोग अंदर फंस गए। 

दरअसल, करीब 1,992 वर्ग फुट में फैली इस बिल्डिंग को 20 अगस्त 2014 को आवासीय भवन के रूप में मंजूरी मिली थी। एलडीए ने वर्ष 2016 में अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की थी और 10 मई 2016 को भवन गिराने का आदेश भी जारी किया था। 

हालांकि, बाद में भवन मालिकों की आपत्ति और सुनवाई नहीं होने के आधार पर 5 जुलाई 2016 को यह आदेश वापस ले लिया गया था। फिलहाल मामले में अलीगंज थाने में शिकायत दर्ज कर ली गई है और पुलिस के साथ प्रशासनिक एजेंसियां पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही हैं।