
Madhuri Elephant Kolhapur (Photo-Vantara)
कोल्हापुर की 'महादेवी' के नाम से मशहूर हथिनी माधुरी की घर वापसी का रास्ता अब साफ हो गया है। हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने 9 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में कड़ी शर्तों के साथ माधुरी को कोल्हापुर स्थित नंदनी मठ वापस भेजने की अनुमति दे दी है। इस फैसले पर जामनगर स्थित वन्यजीव संरक्षण केंद्र वंतारा ने सुप्रीम कोर्ट और HPC के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है। गौरतलब है कि माधुरी को 30 जुलाई 2025 को हाई-पावर्ड कमेटी के निर्देशों और बॉम्बे हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत देखभाल के लिए वंतारा लाया गया था।
वंतारा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने बाद में सभी पक्षों को अपने दावे उच्चाधिकार प्राप्त समिति के सामने रखने के निर्देश दिए थे। पक्षों को सुनने, विभिन्न रिपोर्ट मंगाने और नंदनी स्थित सुविधा का निरीक्षण करने के बाद HPC ने 9 सितंबर 2026 को माधुरी को कोल्हापुर लौटने की अनुमति दी।
हालांकि, उसकी वापसी कई सख्त शर्तों के साथ होगी। माधुरी का इस्तेमाल किसी जुलूस या अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकेगा। उसे 24 घंटे देखभाल उपलब्ध करानी होगी और हर 15 दिन में उसकी मेडिकल जांच करानी होगी। वंतारा ने कहा कि वह HPC के अधिकार का सम्मान करता है और समिति के सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन करेगा।
वंतारा ने कहा कि माधुरी को लेकर उसका रुख हमेशा पशु चिकित्सा विज्ञान और उसके कल्याण पर आधारित रहा है। लगातार इलाज और पशु चिकित्सा देखभाल से उसकी स्थिति स्थिर हुई है, लेकिन उसकी पुरानी बीमारियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
संस्था के मुताबिक, माधुरी को आगे भी उचित देखभाल, सपोर्टिव ट्रीटमेंट और नियमित पशु चिकित्सा निगरानी की जरूरत रहेगी। वंतारा ने स्पष्ट किया कि कोल्हापुर लौटने के बाद भी उनकी टीम हर 15 दिन में नंदनी जाकर माधुरी का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी और रिपोर्ट सक्षम अधिकारियों को सौंपेगी।
वंतारा ने बताया कि माधुरी जिस नंदनी स्थित परिसर में लौट रही है, वहां भी उपलब्ध बुनियादी ढांचे के भीतर उसके लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं। संस्था के अनुसार, टाउन प्लानिंग से जुड़ी पाबंदियों के कारण फिलहाल परिसर में और विस्तार संभव नहीं हो सका। वंतारा ने बताया कि ट्रस्ट की जमीन से होकर गुजरने वाली सड़क के कारण विकास के लिए उपलब्ध जमीन सीमित है। हालांकि, माधुरी के वहां बसने के बाद भी संस्था परिसर के उन्नयन में मठ की मदद के लिए उपलब्ध रहेगी। अदालत या सक्षम प्राधिकरण की ओर से निर्देश मिलने पर भी वंतारा आवश्यक सहयोग करेगा।
वंतारा ने कहा कि वास्तविक पशु कल्याण केवल भावनाओं तक सीमित नहीं है। इसके लिए तथ्यों, पशु चिकित्सा विज्ञान, जिम्मेदार देखभाल, कानूनी प्रक्रिया के सम्मान और जीवन की सुरक्षा के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता जरूरी है। संस्था ने सुप्रीम कोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट और HPC के निर्देशों के लिए आभार जताया। साथ ही महाराष्ट्र और गुजरात सरकारों तथा उनके अधिकारियों, मठ और कोल्हापुर के लोगों का भी धन्यवाद किया।
Updated on:
11 Sept 2026 01:58 pm
Published on:
11 Sept 2026 01:52 pm
