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Maharashtra Politics: क्या शिंदे के जरिए देवेंद्र फडणवीस के प्रभाव को कम करना चाहती है BJP हाईकमान? जानें दोनों नेताओं के कैसे रहे रिश्ते

BJP High Command Maharashtra Political Strategy: महायुति के अंदर भी यह चर्चा है कि एकनाथ शिंदे की बढ़ती ताकत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति भी हो सकती है, खासकर 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए।
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मुंबई

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Ashib Khan

Jul 02, 2026

Maharashtra Politics

एकनाथ शिंदे (बाएं) और सीएम देवेंद्र फडणवीस (Photo-IANS)

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में लागातार घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी को लगातार झटके लग रहे है। पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों के जाने के बाद अब विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर भी शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इसके साथ ही उन्हें शिवसेना की ओर से विधान परिषद का उपसभापति भी निर्विरोध चुन लिया गया।

शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों के गुट में आने के बाद महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक एकनाथ शिंदे का कद बढ़ गया है। वहीं अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल की भी अटकलें लगाई जा रही है। माना जा रहा है कि केंद्रीय कैबिनेट में भी एकनाथ शिंदे का वर्चस्व बढ़ सकता है। 

क्या फडणवीस के प्रभाव को कम करना चाहता है हाईकमान

सियासी गलियारों में अब सवाल उठना शुरू हो गया है कि बीजेपी हाईकमान एकनाथ शिंदे के जरिए फडणवीस के प्रभाव को क्या कम करना चाहता है? इसको लेकर महायुति के अंदर भी यह चर्चा है कि एकनाथ शिंदे की बढ़ती ताकत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति भी हो सकती है, खासकर 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए।

उद्धव के विधायकों पर भी नजर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एकनाथ शिंदे की सांसदों के बाद अब उद्धव ठाकरे के विधायकों पर भी नजर है। हालांकि इस पर बीजेपी की तरफ से भी बयानबाजी शुरू हो गई है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सांसदों के शामिल होने की रणनीति को केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिली थी, लेकिन राज्य स्तर पर विधायकों के संभावित दल-बदल को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

वहीं भाजपा विधायक आशीष देशमुख ने विपक्षी विधायकों को महायुति में शामिल करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा में संख्या बढ़ाना समझ में आता है, लेकिन विधानसभा और विधान परिषद में विपक्ष को कमजोर करने की जरूरत नहीं है।

क्या संसद में दो-तिहाई बहुमत की तैयारी?

एकनाथ शिंदे के ऑपरेशन टाइगर से संसद में एनडीए के सांसदों की संख्या बढ़ी है। बीजेपी सदन में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार करना चाहती है, क्योंकि कई अहम विधेयक पास करने है। जिसमें एक परिसीमन बिल भी शामिल है।  लोकसभा चुनाव 2029 से पहले परिसीमन बिल को सदन से पास करना बीजेपी का मुख्य एजेंडा है। 

विपक्ष का पलटवार

विपक्ष इसे सीधे-सीधे फडणवीस के खिलाफ साजिश बता रहा है। उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने तो साफ कह दिया, "यह ऑपरेशन टाइगर नहीं, ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस है। 2029 के चुनावों को देखते हुए फडणवीस के पर कतरने की पूरी योजना बनाई गई है।

फडणवीस और शिंदे के रिश्तों का इतिहास

देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के रिश्ते पिछले कुछ सालों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं।

  • 2014-19 में फडणवीस सरकार में एकनाथ शिंदे शिवसेना के मंत्री थे।
  • 2019 में उद्धव ठाकरे ने बीजेपी से अलग होकर कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाई।
  • 2022 में शिंदे की बगावत से उद्धव सरकार गिर गई और भाजपा-शिंदे गठबंधन की सरकार बनी, जिसमें शिंदे मुख्यमंत्री बने और फडणवीस उपमुख्यमंत्री।
  • 2024 विधानसभा चुनाव में भाजपा को अधिक सीटें मिलने के बाद फडणवीस फिर मुख्यमंत्री बने, जबकि शिंदे को उपमुख्यमंत्री बनना पड़ा।

शिंदे समर्थकों का दावा है कि 'लाड़की बहिन योजना' जैसी कल्याणकारी योजनाओं ने महायुति की चुनावी जीत में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि शिंदे अब 2029 को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक ताकत और संगठन दोनों को लगातार मजबूत करने में जुटे हैं।

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