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मणिपुर में चार महिलाओं समेत 46 उग्रवादियों ने सरेंडर किया, 20 हथियार सौंपे, सरकार क्या दे रही हैं सुविधाएं?

Imphal militant surrender 2026: तीन साल से हिंसा झेल रहे मणिपुर से आई राहत भरी खबर, 46 उग्रवादियों ने डाले हथियार। जानें सरेंडर पॉलिसी के तहत सरकार क्या सुविधाएं देगी।
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Manipur Chief Minister Khemchand Singh (Photo: IANS)

मणिपुर के मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह (फोटो- IANS)

Manipur Militant Surrender: मणिपुर बीते तीन साल से हिंसा की आग में जल रहा है। हिंसा की चपेट में आने की वजह से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। कई लोगों की मौत हुई है, लेकिन आज राज्य से शांति और सुलह की खबर सामने आई है। प्रतिबंधित संगठन कांग्लेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी-तैबंगनबा गुट (केसीपी-तैबंगनबा) के 46 उग्रवादियों ने राज्य सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें चार महिला कैडर भी शामिल थीं। आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों ने कुल 20 हथियार भी जमा किए।

घर वापसी समारोह का आयोजन

मणिपुर सरकार के गृह विभाग द्वारा आयोजित घर वापसी समारोह का आयोजन इंफाल के मणिपुर राइफल्स परेड ग्राउंड में किया गया। इस कार्यक्रम में सीएम युमनाम खेमचंद सिंह के सामने 46 उग्रवादियों ने सरेंडर किया। दरअसल, मणिपुर सरकार ने उग्रवादियों को अवैध हथियारों के आत्मसमर्पण के लिए दी गई 15 दिन की समयसीमा पूरी होने के बाद हुआ, जो राज्य में शांति प्रक्रिया को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

घर वापसी समारोह को संबोधित करते हुए मणिपुर के मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कहा कि 3 मई, 2023 को राज्य में भड़की जातीय हिंसा ने कुछ लोगों को हथियार उठाकर उग्रवादी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया होगा। उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले विद्रोही समूह की सराहना करते हुए कहा कि बंदूक थामने से राज्य में कभी शांति नहीं आई। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार आत्मसमर्पण करने वालों को मुख्यधारा में लौटने में हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 46 केसीपी उग्रवादियों का यह आत्मसमर्पण संशोधित सरेंडर-कम-पुनर्वास नीति, 2018 के तहत हुआ है, जिसके अनुसार प्रत्येक आत्मसमर्पण करने वाले कैडर को 36 महीने तक हर महीने 6,000 रुपये तक का वजीफा और 4 लाख रुपये का फिक्स्ड डिपॉजिट अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इन कैडरों को कौशल आधारित प्रशिक्षण देने में भी मदद करेगी, ताकि वे सामान्य जीवन में लौटकर स्थायी आजीविका कमा सकें।

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कहा कि राज्य सरकार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को लागू करने की मांग का समर्थन करती है, लेकिन बंद बुलाने की प्रथा को सही नहीं मानती। उन्होंने कहा कि बंद के बजाय लोकतांत्रिक विरोध के अन्य तरीके अपनाए जाने चाहिए, क्योंकि इस तरह के बंद से स्कूल-कॉलेज के छात्रों और दिहाड़ी मजदूरों के जीवन पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि शांति तभी कायम होगी जब राज्य के लोग हथियार छोड़कर संवाद और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी शिकायतों का समाधान करेंगे।

आत्मसमर्पण समझौते पर हस्ताक्षर

समारोह के दौरान सरकार और केसीपी-तैबंगनबा गुट के बीच आत्मसमर्पण स्वीकृति समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए। समूह की ओर से केसीपी-टी अध्यक्ष हाओबीजाम दिलीप उर्फ तैबंगनबा ने और राज्य सरकार की ओर से गृह विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. एम. वेटो सिंह ने हस्ताक्षर किए।

जमा किए गए हथियार और गोला-बारूद

कैडरों द्वारा जमा किए गए हथियारों में फोल्डिंग-बट और फिक्स्ड-बट वाली इंसास राइफलें, एम-22 राइफलें, आरपीजी, 40 एमएम लाथोड, स्मिथ एंड वेसन .38 रिवॉल्वर, 51 एमएम मोर्टार, एसएलआर, मौज़र 9 एमएम पिस्तौल, 9 एमएम पिस्तौल, सीजेड-75 लूगर पिस्तौल, स्मिथ एंड वेसन 9 एमएम पिस्तौल और .32 पिस्तौल शामिल थीं। इसके अलावा 5.56 एमएम, 9 एमएम, 7.62 एमएम और .32 एमएम के कारतूस भी जमा किए गए। जमा किए गए विस्फोटक सामग्री में हैंड ग्रेनेड और डेटोनेटर शामिल थे, जबकि संचार उपकरणों में बाओफेंग हैंडहेल्ड सेट और चार्जर शामिल थे।