
मणिपुर में बिना NRC जनगणना का विरोध तेज, Photo source@IANS
Manipur Shutdown: मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं। इस बीच, मैतेई समूहों ने मांग की है कि जब तक राज्य में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन) का कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक जनगणना स्थगित रखी जाए। इस मांग का मुख्य उद्देश्य 1951 के बाद पड़ोसी देशों से आकर मणिपुर में बसे बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की पहचान करना है। इस विषय पर केंद्र सरकार से वार्ता के लिए राज्य सरकार की एक टीम जल्द ही दिल्ली का दौरा करेगी।
इस मांग को लेकर मंगलवार से शुरू हुए दो दिवसीय बंद से मैतेई-बहुल इंफाल घाटी के अधिकांश हिस्सों में जनजीवन ठप हो गया। एनआरसी पूरा होने तक जनगणना का विरोध कर रहे मैतेई संगठन 'कैंपेन फॉरु जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन' (JFD) ने इस बंद का आह्वान किया था।
मणिपुर सरकार के प्रवक्ता सपम रंजन ने बताया कि राज्य सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर केंद्रीय नेताओं से मुलाकात करेगा और एनआरसी का कार्य पूरा होने तक जनगणना को टालने का अनुरोध करेगा। मैतेई समूह राज्य में एनआरसी लागू करने पर अड़े हैं, ताकि 1951 के बाद पड़ोसी देशों से आकर मणिपुर में बसे अवैध एवं बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की पहचान की जा सके, जिनसे राज्य के मूल निवासियों के अस्तित्व और संस्कृति पर खतरा मंडरा रहा है।
दूसरी ओर, कुकी संगठनों ने मैतेई समुदाय पर आरोप लगाया है कि वे उनकी आबादी को अवैध प्रवासी साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य असम में वर्ष 1971 के बाद आए बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की पहचान के लिए 2019 में एनआरसी को अपडेट किया गया था।
मणिपुर मई 2023 से जारी भीषण जातीय हिंसा की चपेट में है। इस हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। यह संघर्ष मूल रूप से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे राज्य के अन्य वर्गों तक फैल गया। हिंसा के चलते दोनों समुदायों ने एक-दूसरे को अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों से निष्कासित कर दिया है।
मुख्य रूप से हिंदू मैतेई समुदाय इंफाल घाटी में निवास करता है, जबकि बहुसंख्यक ईसाई कुकी समुदाय पहाड़ी इलाकों में बसा हुआ है। 13 मई को हुए दोहरे हमलों में चार लोगों की मौत के बाद नागा और कुकी-जो समुदायों के बीच भी तनाव काफी बढ़ गया है। मंगलवार को इंफाल घाटी के अधिकांश बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बंद समर्थकों ने कई प्रमुख सड़कों और मुख्य मार्गों पर अवरोधक लगा दिए। इस दौरान स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थान, बैंक और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं।
Updated on:
18 Aug 2026 05:35 pm
Published on:
18 Aug 2026 05:33 pm
