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Nepal Flash Flood : चाय की 10 मिनट की देरी ने बचा ली 28 श्रद्धालुओं की जान, नेपाल बाढ़ से बाल-बाल बचे तीर्थयात्री लौटे घर, बताई आपबीती

Nepal Flash Flood : नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के 28 श्रद्धालु बाल-बाल बच गए। चाय के लिए 10 मिनट रुकना और चालक का समय रहते यू-टर्न लेना उनकी जिंदगी बचाने वाला साबित हुआ।
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भारत

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kamlesh sharma

Aug 30, 2026

Nepal Flash Flood

Nepal Flash Flood (Photo-IANS)

नई दिल्ली। तिब्बत सीमा से सटे नेपाल के इलाकों में कुदरत का ऐसा कहर टूटा है, जिसने हर तरफ तबाही के निशान छोड़ दिए हैं। इस भीषण बाढ़ और आपदा के बीच कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 28 तीर्थयात्रियों का एक जत्था शनिवार को सकुशल अपने घर लौट आया। मौत को इतने करीब से देखकर लौटे इन श्रद्धालुओं के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के अनुसार, 28 सदस्यीय इस दल के साथ यात्रा कर रहे तिरुपति की 'साइन इन ट्रैवल्स' के मैनेजिंग डायरेक्टर पेम्मासानी वेंकटरमना ने बताया कि चाय के एक छोटे से ब्रेक और महज 10 मिनट की देरी ने सभी की जान बचा ली।

'10 मिनट पहले पहुंचते तो बह जाते…'

वेंकटरमना ने बताया कि हमें नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित स्याफ्रुबेसी जल्दी पहुंचना था। रास्ते में हम चाय पीने के लिए रुक गए, जिससे हमें 10 मिनट की देरी हो गई। इस दौरान चालक को आगे फ्लैश फ्लड आने की सूचना मिली। चालक ने सूझबूझ दिखाई और तुरंत गाड़ी का रास्ता बदलकर हमें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। अगर वह 10 मिनट की देरी न होती, तो हम सभी हादसे का शिकार हो जाते।

वीजा में तीन दिन की देरी भी बनी वरदान

विशाखापत्तनम निवासी तीर्थयात्री कृष्णैया मुत्याला ने बताया कि वीजा मिलने में हुई तीन दिन की देरी ने भी अनजाने में पूरे समूह की जान बचा ली। उन्होंने कहा कि 28 श्रद्धालुओं का दल मानसरोवर जाने वाला था। वीजा में देरी के कारण उनकी यात्रा भी तीन दिन आगे खिसक गई। यदि यात्रा तय कार्यक्रम के मुताबिक होती तो संभव है कि वे उसी समय स्याब्रुबेसी पुल पर होते, जब बाढ़ का पानी पुल को बहा ले गया। ऐसे में पूरे दल की जान खतरे में पड़ सकती थी।

आंखों के सामने बह गईं बसें और गांव

तिरुपति की तीर्थयात्री कल्पना ने नेपाल में देखे भयावह मंजर को याद करते हुए बताया कि वीजा मिलने के बाद वे सुबह करीब 6:30 बजे होटल से निकले थे। करीब 80 किलोमीटर की यात्रा के बाद वे चाय के लिए रुके। इसी दौरान चालक को फ्लैश फ्लड का अलर्ट मिला और उसने तुरंत वाहन वापस मोड़ दिया।

कल्पना के अनुसार, कुछ ही देर में उन्होंने अपनी आंखों के सामने कई बसों को बाढ़ के तेज बहाव में बहते देखा। इनमें कोलकाता से आए श्रद्धालुओं को ले जा रही दो बसें भी शामिल थीं। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। कई गांव पूरी तरह बह गए, जबकि कुछ गांव बाढ़ के पानी में घिर गए। उन्होंने बताया कि चालक ने धैर्य बनाए रखते हुए सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित वापस काठमांडू के होटल पहुंचाया।