
BJP सांसद निशिकांत दुबे (सोर्स- एक्स ANI स्क्रीनशॉट)
Nishikant Dubey on Congress : दुमका। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए 1969 की एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अगस्त 1969 में यरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद को लेकर हुए घटनाक्रम के बाद मुस्लिम देशों की बैठक बुलाई गई थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के चलते भारत का प्रतिनिधिमंडल मोरक्को भेजा था।
निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्होंने 17 मार्च को संकल्प लिया था कि वह 365 दिनों तक हर दिन कांग्रेस की ओर से देश के खिलाफ किए गए कथित गलत कामों के बारे में उसी तारीख को लोगों को बताएंगे। उन्होंने कहा कि आज इस अभियान का 188वां दिन है।
भाजपा सांसद ने कहा कि 1969 की घटना भारतीय विदेश नीति के इतिहास में 'सबसे अपमानजनक और शर्मनाक क्षणों' में से एक थी। उन्होंने अल-अक्सा मस्जिद का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया भर के मुसलमानों के लिए यह महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। दुबे के अनुसार, सितंबर 1969 में मुस्लिम देशों की बैठक आयोजित की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के संविधान की अनदेखी करते हुए भारत का प्रतिनिधिमंडल मोरक्को की राजधानी रबात भेजा था।
निशिकांत दुबे ने दावा किया कि तत्कालीन भारतीय प्रतिनिधि फखरुद्दीन अली अहमद के रबात पहुंचने के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने भारत की मौजूदगी में बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसके बाद विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल भी हुई। दुबे ने कहा कि नतीजा यह हुआ कि मोरक्को और अन्य मुस्लिम देशों ने भारत को सम्मेलन में शामिल होने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने दावा किया कि अंत में फखरुद्दीन अली अहमद को रबात से वापस जाना पड़ा।
भाजपा सांसद ने इस पूरे घटनाक्रम को भारत के लिए बड़ी बेइज्जती बताते हुए इसके लिए इंदिरा गांधी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कि 20 सितंबर का दिन शोक का दिन है। निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के कारण देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि इस राजनीति ने भारत को दुनिया के सामने शर्मसार किया और देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
Updated on:
20 Sept 2026 05:54 pm
Published on:
20 Sept 2026 05:53 pm
