20 जुलाई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

epaper_icon

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

संसद का Monsoon Session आज से शुरू, राम मंदिर चढ़ावा चोरी, NEET पेपर लीक विपक्ष का टॉप एजेंडा

Monsoon Session begins today: मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में है। पढ़ें पूरी खबर...
2 min read
Google source verification
Mallikarjun Kharge and Rahul Gandhi

मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी (File Photo)

Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र आज से शुरू होने वाला है। राम मंदिर चंदा चोरी मामले और नीट पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में है। उधर, कॉकरोच जनता पार्टी ने भी आज संसद तक मार्च का ऐलान किया है। सत्र का पहला दिन हंगामे के साथ शुरू होने के आसार हैं, लेकिन इस बार विपक्ष बजट सत्र के मुकाबले बिखरा-बिखरा नजर आ सकता है। पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के चुनाव के बाद निचले सदन की स्थिति बिल्कुल बदल गई है।

37 सांसद NDA के साथ आ चुके हैं

अप्रैल में हुए संसद के विशेष सत्र के बाद अब तक 37 विपक्षी सांसद NDA के खेमे में आ चुके हैं। इससे मोदी सरकार को महिला आरक्षण कानून को आगे बढ़ाने और संसद व विधानसभाओं की सीटें बढ़ाने वाला विधायी पैकेज फिर पेश करने में मदद मिल सकती है। जोकि विशेषसत्र के दौरान सदन में दो तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण गिर गया था। लेकिन, सरकार से जुड़े लोगों का कहना है कि जब तक वह नंबर को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो जाते, सदन में विधेयक को पेश नहीं किया जाएगा।

सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का वॉकआउट

संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष का तेवर कैसा रहने वाला है। इस बात का पता बीते रविवार को सर्वदलीय बैठक के दौरान ही चल गया था। सर्वदलीय बैठक में टीएमसी के बागी नेताओं को अलग से आमंत्रित किए जाने पर विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। डीएमके और आम आदमी पार्टी, जो पहले से ही इंडिया गठबंधन की बैठकों से दूरी बनाए हुए थीं, उन्होंने भी बैठक छोड़ दी।

राम मंदिर चंदा चोरी पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखकर राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

परिसीमन बिल को लेकर विपक्ष की राय अलग-अलग

दिलचस्प बात यह है कि परिसीमन बिल पर विपक्ष एकजुट नहीं दिख रहा। एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने साफ कहा है कि यदि बिल में सभी राज्यों के लिए 50 फीसदी सीटें बढ़ाने का प्रावधान साफ तौर पर लिखा जाए, तो उनकी पार्टी समर्थन करेगी। डीएमके, जो पहले परिसीमन का कड़ा विरोध करती थी, तमिलनाडु में सत्ता गंवाने के बाद अब नरम रुख अपना रही है।