
Gaurav Gogoi : मानसून सत्र में पेपर लीक पर तीखी बहस, गौरव गोगोई ने सरकार से मांगा जवाब (फोटो सोर्स : PTI_News)
Parliament Monsoon Session: लोकसभा का गलियारा उस वक्त तनाव से भर गया जब देश के सबसे संवेदनशील मुद्दे 'पेपर लीक' पर चर्चा की शुरुआत हुई। एंटी पेपर लीक बिल पर बहस का दायरा विपक्ष की मांग के बाद 6 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया। लेकिन संसद के भीतर का माहौल सिर्फ विधायी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहा; उसमें सड़क पर लाठियां खा रहे छात्रों का दर्द, चीखें और आक्रोश साफ़ झलका।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सीधे गृह मंत्री के बयान की मांग कर दी। प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई, पैलेट गन के इस्तेमाल और लड़कियों के साथ हुई बदसलूकी के आरोपों को उठाते हुए गोगोई ने कहा, "खून से लथपथ चेहरे के बावजूद एक युवा का लोकतंत्र पर भरोसा बनाए रखना इस सरकार की क्रूरता और युवाओं की हिम्मत का सबूत है। हम इस अत्याचार को कभी नहीं भूलेंगे।"
विपक्ष ने शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा को गुणवत्ता देने के बजाय युवाओं को सिर्फ अपने दल का वोट बैंक बनाने में लगी है। संसद में वसीम बरेलवी और गोपालदास नीरज की पंक्तियों का सहारा लेते हुए विपक्ष ने कहा कि पेनल्टी या सजा बढ़ाने मात्र से परीक्षाओं की शुचिता वापस नहीं आ सकती।
गौरव गोगोई ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, "धर्मेंद्र प्रधान केवल एक प्रतीक हैं। किसी एक व्यक्ति को हटाने भर से छात्रों का खोया भरोसा वापस नहीं लौटेगा। आज देश का युवा सड़कों पर है क्योंकि वह अपने भविष्य को लेकर विवश और लाचार महसूस कर रहा है।"
एंटी पेपर लीक कानून के प्रभाव पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह बिल वास्तविक सुधार लाने के बजाय सिर्फ एक 'दिखावे का संशोधन' है। संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक:
बेल का खेल: नीट (NEET) 2024 पेपर लीक मामले में चार्जशीट किए गए 46 में से 44 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
मास्टरमाइंड आजाद: महीनों तक फरार रहने के बाद पकड़ा गया कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया भी आज जमानत पर बाहर है।
विफलता का दस्तावेज: विपक्षी दलों का कहना है कि जब दो साल पहले बने नियमों से आरोपियों को सजा नहीं मिल सकी, तो केवल कानून सख्त करने का दावा सरकार की असफलता को छिपाने का एक जरिया मात्र है।
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस कानून में पेपर लीक और धांधली में शामिल पाए जाने वाले संगठनों व गिरोहों के लिए 3 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जांच एजेंसियों की सुस्ती और लचर पैरवी के कारण आरोपी आसानी से जमानत पा जाते हैं।
Updated on:
28 Jul 2026 03:34 pm
Published on:
28 Jul 2026 03:07 pm
