
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo-IANS)
BRICS Summit 2026 Modi: ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की भूमिका को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है, लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में पीछे है। अब इस स्थिति को बदलने का समय आ गया है।
इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे आकार देने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वाला रुल टेकर (Rule-Taker) नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला रूल-शेपर (Rule-Shaper) बनना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण को तीन प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार अब और टाला नहीं जा सकता। इस दिशा में होने वाली बातचीत के लिए स्पष्ट समयसीमा और ठोस परिणाम तय किए जाने चाहिए।
पीएम नरेंद्र मोदी ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में भी सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मतदान अधिकार, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। जो देश वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक शासन व्यवस्था को आकार देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबरस्पेस, अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकें केवल भविष्य के अवसरों को तय नहीं कर रही हैं, बल्कि आने वाले समय के वैश्विक नियमों को भी आकार दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि BRICS के माध्यम से ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत और समझौते की तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा कानूनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जा सकती है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय नियम-निर्माण की प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में सबसे आगे है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पीछे है। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को पिरामिड ऑफ प्रिविलेज बताते हुए इसे प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप में बदलने का आह्वान किया।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए 10 प्रमुख प्रस्ताव तैयार किए जाएं और अगले ब्रिक्स समिट तक इन्हें एक व्यापक ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप दिया जाए।
मोदी ने कहा कि इस प्रक्रिया का लक्ष्य ऐसी वैश्विक व्यवस्था बनाना होना चाहिए, जिसमें हर देश की आवाज सुनी जाए, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और मानवता का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता बने।
Updated on:
12 Sept 2026 03:59 pm
Published on:
12 Sept 2026 03:59 pm
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