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Prateek Yadav Death: मां चाहती थीं राजनीति करें प्रतीक यादव, साधना देवी पर परिवार में फूट डालने के भी लगे थे आरोप

Prateek Yadav Death: प्रतीक यादव के निधन की खबर और उनके पारिवारिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ साधना यादव के प्रभाव को लेकर चर्चा रही, जो यादव परिवार की राजनीति से जुड़ी थीं।

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भारत

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Devika Chatraj

May 13, 2026

Prateek Yadav Death

प्रतीक यादव की मौत (X)

Prateek Yadav Death: समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav)के छोटे बेटे प्रतीक यादव (Prateek Yadav) का 13 मई, 2026 की सुबह निधन हो गया। वह मुलायम की दूसरी पत्नी साधना यादव के बेटे और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई थे। साधना यादव का 2022 में गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। वह 62 साल की थीं। उनकी दिली इच्छा थी कि बेटा प्रतीक राजनीति करे, लेकिन उनकी यह ख़्वाहिश अधूरी ही रह गई। हालांकि, कहा जाता है कि बेटे के मना करने पर उन्होंने बहू अपर्णा यादव को राजनीति में उतारा। इसमें शिवपाल सिंह ने उनकी मदद की।

साधना यादव का पार्टी पर भी था प्रभाव

साधना यादव 2003 में यादव परिवार का हिस्सा बनी थीं। मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी मालती देवी के निधन के बाद वह इस परिवार में आईं। वह राजनीति में पूरी तरह सक्रिय नहीं थीं, लेकिन परिवार के साथ पार्टी पर भी उनका प्रभाव था। उन्होंने कई अहम मौकों पर परिवार और पार्टी के फैसलों में अप्रत्यक्ष, लेकिन निर्णायक भूमिका निभाई थी। अपर्णा को राजनीति में लाने का फैसला भी इनमें से एक माना जाता है।

2016 में गहराया पारिवारिक विवाद

साल 2016 में समाजवादी पार्टी के भीतर हुए बड़े पारिवारिक विवाद के दौरान साधना यादव की भूमिका काफी अहम मानी गई थी। यह विवाद तब चरम पर आ गया था जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने (Akhilesh Yadav) ने अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) को मंत्रिमंडल और पार्टी से अलग कर दिया था।

इस विवाद ने पार्टी और परिवार दोनों में दरार पैदा कर दी थी। उस समय मुलायम सिंह यादव ने अपने भाई शिवपाल सिंह यादव का पक्ष लिया था। माना जाता है कि आगे जब अपर्णा ने चुनाव लड़ा तो उन्हें उनकी पसंद की सीट से टिकट दिलाने में शिवपाल ने भी अहम भूमिका निभाई थी।

पर्दे के पीछे की राजनीतिक भूमिका

2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान साधना यादव ने परिवारिक मतभेदों के राजनीतिक प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई थी। तब उनका एक बयान भी आया था। उन्होंने कहा था, 'मैं पर्दे की पीछे से लंबे समय से काम कर रही हूं। मुलायम को सलाह दी है, धर्मेंद्र और अखिलेश को सांसद बनवाया है। यह सब काम किए हैं, पर छुप-छुप कर किए।

उन्होंने एक न्यूज एजेंसी से कहा था कि अखिलेश बहकावे में आ गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि वह अखिलेश को दोबारा सीएम देखना चाहती हैं। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी लोगों का मानना था कि पांच साल पहले साधना नहीं चाहती थीं कि अखिलेश सीएम बनें। उन्हें सीएम बनाने का फैसला मुलायम सिंह यादव का था।